One of the most popular film writers कैसे बना एक फ्लॉप अदाकार … Salim Khan 70 का दशक था एक नौजवान मुंबई के बुलावे पर इंदौर से सपनों के शहर आया, फिल्मों में हीरो बनने का सपना लेकर, सपना तो पूरा हुआ, लेकिन उन्हें कामयाबी वैसे नहीं मिली जिसकी इन्हें उम्मीद थी I एक कामयाब अदाकार बनने के सपने को नाकामयाब होते हुए देख इस नौजवान की नजरे किसी और काम की तलाश करने लगी I यह दौर था जो फिल्म राइटर को सिर्फ मुंशी समझा जाता था, पटकथा और संवाद रचने वाले लोगों को ना तो कोई खास दर्जा मिलता और ना ही अच्छी कीमत, यह बात इस नौजवान को गवारा नहीं थी I
इस नौजवान ने फिल्मों में अदाकार बनने का सपना छोड़ फिल्म लेखक बनने का फैसला किया, उस वक्त फिल्म डायरेक्टर Abrar Alvi का असिस्टेंट था, और एक दिन बातों बातों में इस नौजवान ने अबरार अल्वी से कहा कि आप देखना की एक दिन ऐसा आएगा की फिल्म राइटर को एक सुपरस्टार के बराबर समझ जाएगा और सुपरस्टार के बराबर ही उन्हें पैसा भी मिलेगा I उस वक्त अबरार अल्वी ने इस नौजवान को बड़े ही प्यार से कहा कि देखो तुमने मेरे सामने तो यह बात कही लेकिन किसी और के सामने कभी नहीं बोलना वरना लोग तुम्हारा मजाक बनाएंगे I
वह कहते हैं ना वक्त को बदलने में थोड़ा वक्त तो लगता है, और इस नौजवान ने अपने कही हुई बात को सच साबित कर दिखा, इनके एक कलम ने वह तहलका मचाया की बहुत से सुपरस्टार कमाई के मामले में इनसे पीछे छूट गए I फिल्म और संवाद लेखन का सलीका बदलने वाले इस शख्सियत को आज पूरी दुनिया Salim Khan के नाम से पहचानती है, जी हां सलीम जावेद के जोड़ी से मशहूर सलीम खान I
हिंदुस्तानी फिल्मों के मशहूर फिल्म राइटर और फिल्म मेकर Salim Khan जिन्हें आज पूरी दुनिया सुपरस्टार सलमान खान के पिता के नाम से भी जानती है I सलीम जावेद की जोड़ी बनने के साथ ही कई मेथड भी टूटे, और फिल्म लेखन के मायने भी बदले, यह वही जोड़ी है जिसेने एक से बढ़कर एक फिल्में लिखीं और हिंदुस्तान के फिल्म इंडस्ट्री को Deewar, Sholay, Zanjeer और Don जैसी कभी ना भूलने वाली सुपर हिट फिल्में दी I
यह दौर था जब प्यार, रोमांस कुछ सीमित विषय की कहानी के किस्सों का हिस्सा हुआ करते थे, दिग्गज अदाकार राजेश खन्ना का स्टारडम उस वक्त बुलंदियों पर था, इस दौरान सलीम जावेद सिल्वर स्क्रीन पर एक नया किरदार गढ़ रहे थे, जो एंग्री यंग मैन के शक्ल में सामने आया और देखते ही देखते राजेश खन्ना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हुआ I इसके पीछे थी सलीम जावेद की सदी हुए कलम और कमाल के फिल्मी टॉपिक I फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा हिट फिल्में लिखने का रिकॉर्ड अगर है तो वह भी सलीम जावेद के नाम ही है, यूं तो सलीम खान के काम की चर्चा जावेद अख्तर के बिना अधूरी है I
तो दोस्तों आज हम इस ब्लॉग में जानेंगे Salim Khan जी के फिल्मी सफर और निजी जिंदगी के बारे में और हीरो बनने इंदौर से मुंबई पहुंचे Salim Khan कैसे बन गए सबसे मशहूर और महंगे फिल्म राइटर I इंदौर में 24 नवंबर 1935 को एक पठान परिवार में सलीम खान का जन्म हुआ, इनका पूरा नाम सलीम अब्दुल रशीद खान हैं, सलीम खान के दादा अनवर खान अफगानिस्तान के पठान थे, और सन 1800 के दशक के आस पास ब्रिटिश इंडियन आर्मी में नौकरी करने के लिए इंदौर आए थे I
उनके पिता का नाम अब्दुल रशीद खान था, और वह इंडियन इंपीरियल पुलिस सेवा में अधिकारी थे, और एक दौर में वह इंदौर के DIG भी रह चुके थे I Salim Khan का ताल्लुक भरे पूरे संपन्न और आर्थिक रूप से मजबूत परिवार में जन्म हुआ था I इंदौर में उनके पिता का 12 कमरों का मकान था, लेकिन वह कहते हैं ना कि पैसे से आप सब कुछ खरीद सकते है लेकिन खुशियां नहीं I
Salim Khan सिर्फ 5 साल की ही थे जब उन्हें पता चला कि उनकी मां Siddika Bano Khan को टीबी की बीमारी हो गई है, और टीबी यह उस जमाने में एक ला इलाज बीमारी थी I उस दौर में इसका कोई इलाज नहीं था, इसी वजह से छोटे बच्चों को इससे पीड़ित लोगों के पास जाने से या उन्हें गले लगाने से मना किया जाता था I
इस बीमारी का पता चलने के बाद Salim Khan के मां से किसी को भी मिलने नहीं दिया जाता था, 5 साल की छोटी उम्र में ही सलीम अपनी मां से दूर हो गए, और 9 साल के उम्र में इन्होंने अपनी मां को खो दिया, टीबी जैसी ला इलाज बीमारी से 4 साल तक लड़ते हुए थक कर इलाज न होने की वजह से उनकी मां का इंतकाल हो गया I
कुछ साल बाद जब Salim Khan दसवीं में थे तब इनके पिता अब्दुल रशीद खान का भी जनवरी 1950 में इंतकाल हो गया, सलीम खान से बडे उनके एक भाई और तीन बहने थी, और भाई बहनों में सलीम खान सबसे छोटे थे I बचपन से ही सलीम को क्रिकेट का बहुत शौक था, और वह अपने स्कूल की तरफ से क्रिकेट खेला करते थे, स्कूल के बाद कॉलेज में भी क्रिकेट के चलते सलीम खान काफी मशहूर हुए थे I
Salim Khan ने St. Raphael’s School, Indore से अपनी मैट्रिक यानी दसवीं की परीक्षा दी, और इंदौर के Holkar College से पोस्ट ग्रेजुएशन कंप्लीट किया I जैसे-जैसे वक्त बितता गया वैसे ही क्रिकेट में उनकी दिलचस्पी कम होती गई, और इन्हें पायलट बनने का शौक चढ़ गया, और बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि सलीम खान ने पायलट बनने की ट्रेनिंग भी ली थी, और इन्हें 100 घंटे उड़ान भरने का एक्सपीरियंस भी है I
अब तक Salim Khan यह तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें क्या करना है, इसी दौरान इंदौर में फिल्म इंडस्ट्री के नामी शख्सियत के बेटे की शादी थी, वह शख्स थे ताराचंद बड़जात्या यह वही ताराचंद बड़जात्या हैं जो राजश्री फिल्मस के Founder थे, हालांकि उस वक्त तक उन्होंने Rajshri Films की स्थापना नहीं की थी I इस शादी में Salim Khan भी मौजूद थे क्योंकि ताराचंद बड़जात्या यह फिल्म इंडस्ट्री के नामी हस्ती थे जिसकी वजह से मुंबई से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बहुत से कलाकार उस शादी में आए थे I
जिनमें उस जमाने के दिग्गज फिल्म प्रोड्यूसर K. Amarnath Salim Khan की डैशिंग पर्सनालिटी को देखकर काफी आकर्षित हुए थे, और उन्होंने सलीम खान को फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने की सलाह दी, और यहीं से सलीम खान की किस्मत बदलने शुरू हुई I
K. Amarnath ने सलीम खान को मुंबई आने के लिए पैसे भी दिए सलीम खान ने उनसे कहा कि मैंने कभी भी स्टेज पर या थिएटर में काम नहीं किया है, मैं फिल्मों में एक्टिंग कैसे कर पाऊंगा I उस वक्त प्रोड्यूसर अमरनाथ ने उन्हें दिग्गज अदाकार दिलीप कुमार साहब की मिसाल देते हुए कहा कि दिलीप साहब ने भी कभी थिएटर या कोई स्टेज ड्रामा नहीं किया था, फिर भी आज वह एक महान और कामयाब सुपरस्टार है, अमरनाथ जी के इस बात से सलीम खान इंप्रेस हुए I
घर आने के बाद जब उन्होंने यह बात उनके बड़े भाई को बताइए तो वह काफी नाराज हुए और सबके सामने कहा कि मुंबई जाकर कुछ दिनों बाद वापस लौट आएंगे, या फिर वहां से खात भेज कर पैसे मांगेंगे, लेकिन सलीम खान ने अपने बड़े भाई से वादा किया कि ना तो मैं वापस लौट आऊंगा और ना ही मैं पैसे मांगूंगा, इसके बाद सलीम खान आ गए सपनों के शहर बॉम्बे I
बॉम्बे आने के बाद Salim Khan को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, इसी दौरान सलीम खान के मन में कई बार यह ख्याल आया कि इंदौर वापस लौट जाए लेकिन भाई से किया हुआ वादा उन्हें अपने शहर लौटने नहीं दे रहा था I कुछ वक्त के बाद फिल्म प्रोड्यूसर के अमरनाथ ने इन्हें साल 1960 में अपनी फिल्म “बारत” में एक सपोर्टिंग रोल दे दिया, इसके बाद लगभग 25 फिल्मों में सलीम खान ने बतौर अदाकार के रूप में काम किया, ज्यादातर फिल्मों में यह सपोर्टिंग ऐक्टर ही रहे, और इनमें से कुछ फिल्में ऐसी थी जो कभी रिलीज ही नहीं हुई I
साल 1962 से लेकर 1967 के बीच सलीम खान बतौर मुख्य अदाकार के तौर पर प्रोफेसर, बचपन, आंधी और तूफान, सरहादी लुटेरा, तीसरी मंजिल, दीवाना, छैलाबाबू और वफादार जैसे कोई फिल्मों में काम किया, लेकिन एक कामयाब अदाकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने में असफल रहे I
यही वजह थी कि अब सलीम खान के मन में एक्टिंग के प्रति दिलचस्पी कम हुई थी, और उन्होंने अदाकार के तौर पर काम नहीं करने का फैसला किया, और फिल्म लेखन यानी की फिल्म राइटर बनने का फैसला किया I इस तरह से सलीम खान ने उस दौर के मशहूर फिल्म लेखक अबरार अल्वी के यहां महीना ₹500 तनख्वाह पर असिस्टेंट लेखक के तौर पर काम करने लगे I
वक्त के साथ-साथ फिल्म राइटिंग में सलीम खान हर दिन आगे बढ़ते गए और साल 1969 में रिलीज हुई फिल्म दो भाई बतौर फिल्म राइटर सलीम खान का पहला इंडिपेंडेंस प्रोजेक्ट था और उस वक्त जावेद अख्तर Kaifi Azmi के असिस्टेंट थे, और वह डायरेक्टर बनाना चाहते थे Kaifi Azmi और Abrar Alvi पड़ोसी थे, और यही वजह थी कि सलीम खान की जावेद अख्तर की अक्सर मुलाकाते होने लगी I
साल 1966 में आई फिल्म सरहदी लुटेरा के मेकिंग के दौरान इन दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई, इस फिल्म में सलीम खान बतौर मुख्य अदाकार के तौर पर और जावेद डायरेक्टर के असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे थे I इसके कुछ वक्त के बाद इन दोनों ने सलीम-जावेद की जोड़ी बना ली और आगे चलकर यह हिंदी फिल्में की कामयाब जोड़ी साबित हुई I
साल 1971 में फिल्म हाथी मेरे साथी मैं स्क्रिप्ट और डायलॉग लिखने के लिए पहली बार राजेश खन्ना ने सलीम-जावेद को मौका दिया, फिल्म हाथी मेरे साथी सुपरहिट रही और इसके बाद यह दोनों कामयाबी के रास्ते पर आगे बढ़ते चले गए I सलीम-जावेद ने फिल्म लेखन की परिपाटी को एक नए अंदाज में पेश किया, और दर्शकों के सीधा दिल में उतारने वाला नया अंदाज, फिल्म का एक-एक डायलॉग सुकून से और इतनी शिद्दत से तैयार करते की फिल्म दीवार इसकी जीती जागती मिसाल है I
इसमें सलीम जावेद इस जोड़ी ने स्क्रीन प्ले को इतनी डिटेल में लिखा, स्क्रिप्ट में छोटे-छोटे बातों का जिक्र किया गया, और उसके बारीकियां का भी ख्याल रखा गया I यह उस दौर में नई बात थी इस फिल्म के रिलीज के बाद सलीम-जावेद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे महंगे राइटर बने I
सलीम जावेद के करियर में फिल्म दोस्ताना काफी महत्वपूर्ण साबित हुई, यह ना सिर्फ हिट रही बल्कि इसके जरिए से सलीम खान का बहुत पुराना सपना भी सच हुआ था, वही सपना जो की एक फिल्म राइटर की फीस किसी एक्टर या सुपरस्टार से काम नहीं होगी I
दरअसल फिल्म दोस्ताना में महानायक दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन को मुख्य किरदार में लिया गया था और इस फिल्म के प्रोड्यूसर यश जौहर ने अमिताभ बच्चन को 12.30 lakh rupees फीस दी थी, जबकि इस फिल्म के लेखक जोड़ी सलीम जावेद को 12 lakh rupees इनकी फीस दी गई I
कुछ वक्त पहले अपने कही हुई बात सच साबित होने परSalim Khanने अपने पुराने मालिक अबरार अल्वी को फोन कर कहां की आपको याद है एक बार जब मैंने आपसे कहा था की एक वक्त ऐसा भी आएगा जब राइटर को फिल्म के मुख्य अदाकार के बराबर पैसे मिलेंगे, देखिए मेरी वह बात आज सच साबित हुई, सलीम खान की यह बात सुन अबरार अल्वी बहुत खुश हुए, और उन्होंने सलीम खान की काफी तारीफ भी की I
सलीम जावेद इस मशहूर जोड़ी ने मिलकर 1971 से लेकर 1982 के दौरान तक लगभग 24 फिल्मों में एक साथ काम किया, जिनमें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की 22 और कन्नड़ की दो फिल्में शामिल रही, इस मशहूर जोड़ी ने हिंदुस्तानी फिल्म जगत को एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी, दोनों ने मिलकर
- 1975
- शोले
- 1978
- डॉन
- 1996
- मंझधार
- 1996
- दिल तेरा दीवाना
- 1994
- आ गले लग जा
- 1991
- मस्त कलंदर
- 1991
- एक
- 1991
- पत्थर के फूल
- 1990
- ज़ुर्म
- 1989
- तूफ़ान
- 1988
- कब्ज़ा
- 1987
- मिस्टर इंडिया
- 1986
- नाम
- 1982
- शक्ति
- 1981
- क्रांति
- 1980
- जीवविज्ञान
- 1980
- शान
- 1979
- काला पत्थर
- 1978
- त्रिशूल
- 1978
- डॉन
- 1977
- इमान धर्म
- 1977
- चाचा भतीजा
- 1975
- शोले
- 1975
- दीवार
- 1974
- जबरदस्ती
- 1973
- ज़ंजीर
- 1973
- यादों की बारात
- 1972
- सीता और गीता
- 1971
- हाथी मेरे दोस्त
जैसे सुपरहिट फिल्में लिखी दी I
सलीम जावेद से जुड़ा हुआ एक दिलचस्प किस्सा :
जब एक बार देर रात सलीम जावेद पेंट और ब्रश लेकर चोरों की तरह मुंबई के सिनेमा हॉल पहुंचे, दरअसल यह वह वक्त था जब पहली बार सलीम जावेद के नाम को फिल्म के पोस्टर पर जगह मिली, और उस दौर में स्टोरी और स्क्रीन प्ले लेखक का नाम फिल्म के पोस्टर पर नहीं लिखा करते थे I
फिल्म जंजीर के रिलीज के पहले इस फिल्म के निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा ने फिल्म के पोस्टर पर सलीम जावेद का नाम लिखने का फैसला किया था, लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो फिल्म के पोस्टर पर अपना नाम न देखकर सलीम जावेद काफी नाराज और गुस्सा हुए, जिसकी वजह से वह खुद ही रात में पेंट और ब्रश लेकर मुंबई के सिनेमा घर में लगे हुए पोस्टर पर खुद ही अपना नाम लिख दिया I
12 साल एक साथ काम करने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया की सलीम और जावेद की यह जोड़ी टूट गई, सलीम जावेद की यह जोड़ी क्यों टूटी इसको लेकर बहुत सी कहानी सोशल मीडिया पर आपको देखने और पढ़ने को मिलेंगे लेकिन इसकी सिर्फ एक वजह नहीं थी, इस जोड़ी के टूटने के बहुत से कारण थे I एक इंटरव्यू के दौरान Salim Khan ने खुद यह कहां की जावेद अख्तर का रुझान गीत लिखने की तरफ ज्यादा होने लगा था और जबकि मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं था और अलग होने की पहल जावेद अख्तर ने पहले की थी I
इस जोड़ी के टूटने की वजह अमिताभ बच्चन को भी बताते हैं कहां जाता है की फिल्म मिस्टर इंडिया में अनिल कपूर की जगह अमिताभ बच्चन को मुख्य अदाकारा के तौर पर लेना चाहते थे, और उस वक्त अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म को करने से मना कर दिया, और यह बात जावेद अख्तर को ना गवार गुजरी, और जावेद अख्तर ने आगे कभी भी अमिताभ बच्चन के साथ काम न करने का फैसला किया I
लेकिन जावेद अख्तर की इस फैसले से Salim Khan सहमत नहीं थे I इस जोड़ी के टूटने की वजह चाहे जो भी हो लेकिन इस जोड़ी ने जितना भी और जो भी वक्त साथ में काम किया, उसके कामयाबी का औसत बहुत अच्छा रहा और उसे कभी बुलाया नहीं जा सकता I
Salim Khan की Personal Life :
Salim Khan ने दो शादियां की थी और उनकी पहली शादी साल 1964 में सुशीला नामक एक मराठी हिंदू महिला से हुई थी, और शादी के बाद सुशीला ने अपना नाम सलमा खान रख लिया, इस जोड़ी के चार बच्चे हैं, Salman Khan, Arbaaz Khan, Sohail Khan और एक बेटीAlvira Khan I सलीम खान के तीनों बेटे आज के दौर के कामयाब और मशहूर सुपरस्टार है और वह किसी पहचान के मोहताज नहीं है, दुनिया भर के लोग उन्हें पहचानते हैं I
एक वक्त ऐसा भी आया कि जब Salim Khan का दिल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर डांसर Helen के लिए धड़कने लगा था, और हेलेन भी सलीम खान से बेपनाह मोहब्बत करती थी, और Salim Khan ने अपने मोहब्बत को अंजाम तक पहुंचाने के लिए Helen से शादी करने का फैसला किया I इसी बात पर पत्नी सलमा खान और बेटे सलमान खान के साथ पूरा परिवार सलीम खान के खिलाफ हो गया, तमाम मुश्किलों और परेशानियों के बाद भी सलीम खान अपने फैसले से पीछे नहीं हटे, और हेलेन को अपनी दुल्हन बनाकर ही माने I
Salim Khan की दूसरी शादी की वजह से उनके चारों बच्चे काफी नाराज हुए थे, और वह Helen से सीधे मुंह बात तक नहीं करते थे, और दूसरी शादी के बाद जब Salim Khan घर देर रात पहुंचते, तो सलमान खान काफी गुस्सा हो जाते I शुरू में सलमान खान का पूरा परिवार इस बात से काफी नाराज था लेकिन बाद में जब हेलेन ने सबको ऐसी मोहब्बत और प्यार दिया कि सब ने उन्हें अपना लिया और उनके साथ हंसी खुशी से रहने लगे, Salim Khan और हेलन की कोई भी औलाद नहीं हुई, जिसकी वजह से इन दोनों ने एक बेटी को गोद लिया और उसका नाम Arpita Khan है I
Salim Khan को मिले हुए अवार्ड और पुरस्कार :
एक साथ काम करने के दौरान 6 फिल्म फेयर पुरस्कार जीते, साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म जंजीर के लिए बेस्ट स्क्रीन प्ले और बेस्ट स्क्रीन स्टोरी का अवार्ड Salim Khan और Javed Akhtar को मिला, और साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म दीवार के लिए बेस्ट डायलॉग और बेस्ट स्क्रीन प्ले स्टोरी का अवार्ड मिला, तो इसी के साथ साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म शक्ति के लिए बेस्ट स्क्रीन प्ले का अवार्ड मिला I
Salim Khan ने बहुत से फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया है, जिनमें 1989 में आई फिल्म आखिरी गुलाम 1993 में इंसानियत का देवता, 2000 में आई बिल्ला नंबर 786 फिल्म के प्रोड्यूसर सलीम खान ही थे I बदलते दौर में Salim Khan ने अपने परिवार को जोड़ कर रखा है, और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इनका परिवार एक मिसाल है इतने बड़े सुपरस्टार होने के बावजूद भी सलमान खान आज भी अपने पिता के साथ उनके घर पर ही रहते हैं, और उनके घर पर चाहे मुस्लिम हो या हिंदू दोनों ही त्योहार परिवार एक जैसे ही मानते हैं I ईद या दिवाली दोनों मौकों पर जश्न होता है I
Salim Khan अक्सर यह कहां करते हैं कि अच्छा इंसान वह है जिसके दोस्त और नौकर पुराने हैं सलीम खान बताते हैं की शादी के बाद उनकी पत्नी सलमा ने शादी के वक्त 1964 में उनके साथ एक नौकर गंगाराम को साथ लेकर आई थी, और तब से लेकर आज तक वह उनके यहां पर काम करते हैं सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पूरे परिवार में गंगाराम को ना तो कोई डांट सकता है और ना ही चिल्ला कर बात कर सकता है I
Salim Khan ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने एक बार गंगाराम को डांट लगाई थी इसके बाद उनकी पत्नी सलमा ने उनसे 6 महीने तक बात नहीं की सलीम खान आज 90 वर्ष के हो चुके हैं और उनके तीनों बेटे आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर नाम बन चुके हैं, लेकिन सलीम खान आज भी down to earth यानी की जमीन से जुड़े हुए आदमी है हम उम्मीद करते हैं कि यह अपने भरे पूरे परिवार के साथ Salim Khan ऐसे ही खुशहाल जिंदगी गुजारे I
तो दोस्तों यह थी एक फ्लॉप अदाकार से One of the most popular film writers बनने वालेSalim Khan की जीवन का परिचय I