कब्रिस्तान में रोने वाला अफगानिस्तान का एक बच्चा कैसे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का मशहूर और सदियों तक ना भूलने वाला शख्स बना….Kader Khan हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसा शख्स जिन्होंने गरीबी और बदनामी की जिंदगी से उठकर हिंदुस्तान के फिल्मी दुनिया में इतना नाम कमाया की सबके लिए एक मिसाल बन गए I
एक आईकॉनिक डायलॉग राइटर, शानदार अदाकार और एक बेमिसाल थिएटर आर्टिस्ट जिन्होंने रूपाहेली पर्दे पर अपने सुनहरे अक्षरों से अपने कामयाबी की इबारत लिख डाली, और ऐसे मल्टी टैलेंटेड शख्स के बिना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को अधूरा माना जाता है I एक अफगान, इंडियन कनाडा फिल्म एक्टर जिन्होंने फिल्मों में कभी एक शानदार खलनायक का किरदार निभाकर सबको डराया, तो कभी लोटपोट कर देने वाली कॉमेडी से सबको खूब हसाया I
80, 90 के दशक में धारदार कलाम की वजह से दिग्गज फिल्म मेकर्स की पहली पसंद बन गए, तो वही सुपरस्टार Amitabh Bachchan उनके लिखे डायलॉग पर अपनी जान छिड़कते थे, जिन्होंने 22 फिल्मों में उनके लिखे डायलॉग से समा बांध लिया I
250 से ज्यादा फिल्मों में डायलॉग लिखने वाले इस शानदार फनकार पर कुछ फिल्मों में Double Meaning डायलॉग लिखने और अश्लीलता फैलाने के इल्जाम लगे, 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय करने वाले Kader Khan ने अपने गरीबी से जूझते हुए और किस्मत से लड़ते हुए अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और उसी कॉलेज में लेक्चरर बन गए I
ऐसा क्या हुआ था कि जब Kader Khan 4 साल के थे तब इनके माता-पिता का तलाक हो गया, और उनके सौतेले पिता ने लगभग 20 सालों तक इनके साथ वह ज्यादती और क्रूरता दिखाइए जिसे देख रूह काप जाए I तो मस्जिद की सीढ़िया और कब्रिस्तान के सन्नाटे में अपना बचपन गुजारने वाले इस शख्स ने कैसे मुफलिसी के फर्श लेकर कामयाबी के अर्श तक का सफर तय किया I
आज हम जानेंगे एक ऐसे मल्टी टैलेंटेड शख्स जिसके बिना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को अधूरा माना जाता है, यह शख्स न सिर्फ एक अदाकार थे, बल्कि एक बेहतरीन कॉमेडियन, एक जबरदस्त विलन, स्टोरी राइटर डायलॉग राइटर, एक निर्माता और निर्देशक Kader Khan Sahab के बारे में I इन्होंने अपने हर एक अंदाज से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अविस्मरणीय, यानी Incredible, कभी ना भूलने वाली छाप छोड़ी है, इन्होंने न सिर्फ बेहतरीन फिल्मों के डायलॉग लिखे, बल्कि बहुत सी फिल्मों में जबरदस्त अभिनय भी किया है I
1990 के दशक का हर वह बच्चा जो हिंदी फिल्मों को देखते हुए बड़ा हुआ, वह Kader Khan इस नाम से अच्छे से वाकिफ होगा, यह वह वक्त था जब Kader Khan साहब कॉमेडी का पर्याय बन चुके थे, और इनका फिल्मों में होना हंसी की गारंटी माना जाता था I
खासकर फिल्म डायरेक्टर David Dhawan के फिल्मों में अदाकार Govinda और Shakti Kapoor के साथ इनकी जोड़ी ऐसी जमी की एक के बाद एक लगातार बहुत से हिट फिल्में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को दिए I तो वही खलनायक के किरदारों के साथ भी Kader Khan साहब न्याय किया और अपने तल्खी और चालाकी से लब्रिज किरदारों को भी जिंदा कर दिया I इस तरह से कादर खान जी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हर तरह के किरदार निभाए और हिंदी फिल्मों में अपनी एक अलग पहचान बनाएं, और जब एक दौर ऐसा भी आया कि उनके बिना हिंदी फिल्में अधूरी लगती थी I
Kader Khan ने अपने एक्टिंग के अलावा अपने कलाम के तेज धार से भी सैकड़ो फिल्मों में समा बांधा और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे मशहूर और काबिल राइटर में शुमार हो गए, बहुत कम ही लोग यह बात जानते होंगे की Kader Khan ने Shayar Ghalib के कई मुश्किल गजलों का सरल अनुवाद किया और अपनी किताब के जरिए से उन्हें आम लोगों तक पहुंचा I
22 अक्टूबर 1937 को अफगानिस्तान के काबुल में एक सुन्नी मुस्लिम परिवार में Kader Khan का जन्म हुआ, इनके पिता का नाम Abdul Rahman Khan और इनकी मां का नाम Iqbal Begum था और वह ब्रिटिश भारत के बलूचिस्तान के रहने वाली थी I यह अपने मां-बाप की 4 औलाद थे, और इसे पहले के तीनों बच्चों का इंतकाल हो चुका था I
बेहद छोटी उम्र में अपने तीनों बच्चों को खोने की वजह से Kader Khan के मां के मन में डर बैठ गया था, उनको ऐसा लग रहा था कि कबूल की हवा उनके बच्चों को सूट नहीं कर रही, इसीलिए उन्होंने अपने पति को इस बात के लिए राजी किया कि वह उस जगह को छोड़ दे, और अपनी बीवी की बात मानते हुए, अब्दुल रहमान खान अफगानिस्तान को छोड़कर हिंदुस्तान के मुंबई शहर में आकर रहने लगे I
अपने शहर अफगानिस्तान को छोड़कर मुंबई में जाकर रहना और अपने जिंदगी के फिर से नई शुरुआत करना आसान नहीं था, Kader Khan के परिवार के पास इतने अच्छे पैसे तो थे नहीं की किसी अच्छे इलाके में किराए पर घर ले सके, और उस दौर में यहां कमाई का कुछ अच्छा जरिया भी नहीं था I उस जमाने की बहुत ही गंदी मानी जाने वाली कमाठीपुरा के इलाके में अब्दुल रहमान एक ही कमरे का घर किराए पर लेकर अपने परिवार के साथ रहने लगे I
नई शहर नई जगह पर काम मिलना आसान नहीं था, लेकिन अब्दुल रहमान अफगानिस्तान के कंधार में बहुत बड़े मौलवी थे, इस्लाम के बहुत बड़े विद्वान थे, उन्होंने अरबी और उर्दू भाषा में Postgraduate किया था, और इन्होंने नीदरलैंड में इस्लाम सीखने के लिए एक इस्लामी संस्था खोली थी, और यह अरबी और उर्दू के अलावा भी दर्जनों भाषाएं जानते थे, जिसकी वजह से इन्हें एक मस्जिद में भाषा सीखने का काम मिला I
मस्जिद में भाषा सीखने के इन्हें हर महीना 5, 6 रुपए ही मिलते थे, और यह रकम परिवार चलाने के लिए बहुत कम थी, और ऐसे में पति-पत्नी के बीच घर खर्च को लेकर झगड़ा होने लगे, और इस झगड़ों के बीच दोनों का तलाक भी हो गया, और उस वक्त Kader Khan सिर्फ 4 साल के ही थे I फिर कुछ वक्त के बाद कादर खान के नाना ने अपने एक दूर के रिश्तेदार के साथ अपने बेटी का दूसरा निकाह कर दिया, और यहीं से Kader Khan और उनकी मां के जिंदगी की बर्बादी की शुरुआत हुई I
दरअसल Kader Khan के सौतेला पिता एक नंबर के जुआरी, शराबी और घटिया किस्म का आदमी था, उसने शादी के कुछ ही दिनों बाद अपना असली रंग दिखाना शुरू किया, अपनी बीवी और सौतेली बेटे को मारने लगा, पर अब गलती तो हो चुकी थी, और कादर खान के मां के लिए इस शख्स से छुटकारा पाना भी इतना आसान नहीं था I
सौतेला पिता कादर खान पर इस कदर जुल्म करने लगा कि वह उससे भीख तक मंगवाने लगा, और कादर खान को बार-बार उनके अपने पिता यानी कि उन्हें जन्म देने वाले पिता जो मस्जिद में काम करते थे, उनके पास भेजता और उनसे पैसे मांगने को कहता, और उस मस्जिद के बाहर इन्हें भीख तक मांगने पर मजबूर कर देता I
इस तरह से गरीबी, अत्याचार और जुल्म से मां बेटे की जिंदगी पूरी तरह से जहन्नुम बन गई थी, और वह इतना बेशर्म कमीना शख्स था कि वह अपनी पत्नी को छोड़ने को तक तैयार नहीं था, वह उनसे भी घर-घर काम करवाता और उनकी पूरी कमाई ले लेता I एक इंटरव्यू में खुद कादर खान ने इस बात का खुलासा किया था कि वह तो उनके और उनके मां के लिए जहन्नुम से काम नहीं था कि आज अगर रोटी मिली तो कल का कोई ठिकाना नहीं था I
जब Kader Khan की पढ़ने लिखने की उम्र हुई तब हर तरह की मुश्किलों का सामना करते हुए अपने नजदीक के ही एक सरकारी स्कूल में कादर खान का दाखिला करवाया, और इस तरह से दिन गुजरने लगे, और कादर खान के सौतेले पिता का अत्याचार अभी भी जारी था I कादर खान जिस इलाके में रहते थे वहां के कुछ बच्चे फैक्ट्री में काम करते थे और उन्हें उस काम के पैसे मिलते थे, मुश्किलों से भरी जिंदगी को देखते हुए कादर खान ने एक दिन सोचा की क्यों ना मैं भी उन्हें बच्चों के साथ जाकर उस फैक्ट्री में कम करो, यही सोचकर एक दिन कादर खान उन बच्चों के साथ फैक्ट्री में काम करना शुरू किया I
एक दिन Kader Khan के काम के बारे में उनकी मां को पता चला तब मां ने एक दिन अचानक जब हर रोज की तरह कादर खान अपने काम के लिए निकले मां ने पीछे से आकर आधे रास्ते से वापस घर ले आई, और कहां की अगर तुम्हें वाकई में मेरी फिक्र है और तुम मेरे लिए कुछ करना चाहते हो तो तुम दिल लगा कर पढ़ाई करो तुम्हें किसी भी तरह का कोई भी काम या मजदूरी करने की जरूरत नहीं है I
जबKader Khan की उम्र 8 साल की थी तब उनकी मां उनको सजदे के लिए हर रोज मस्जिद भेजना लगी, तब पता चला कि कई बार कादर खान पढ़ने मस्जिद ना जाकर कब्रस्तान चले जाते थे, और उस कब्रस्तान में बैठकर ऊपर अल्लाह से घंटो बातें किया करते थे I अल्लाह से कभी अपने परेशानियां और मुसीबत के बारे में बताते तो कभी रोते, तो कभी जोर-जोर से चिल्लाते हुए फरियाद करते, शायद एक दिन अल्लाह ने उनकी फरियाद सुन ली I
हुआ यू था कि रोज की तरह ही कादर खान कब्रिस्तान में चिल्ला रहे थे, और अल्लाह से अपनी फरियाद कर रहे थे, और यह आवाज उस कब्रिस्तान के पास से गुजर रहे एक थिएटर आर्टिस्टAshraf Khan को सुनाई दी I इतने छोटे बच्चों की दमदार और बेबाक बातें सुनकर दंग रह गए और वह कादर खान के पास आए और उनके बारे में उनकी पूरी जानकारी ली और उनकी मां से मिलकर समझा कर अपने एक प्ले में काम करने के लिए राजी कर लिया I
कादर खान को 1 महीने की ट्रेनिंग दी गई और इस नाटक में उन्हें एक राजकुमार की तरह पेश किया गया, कादर खान के अभिनय जीवन का खुश हाल सफर, जो आगे चलकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सुनहरा दौर के रूप में सामने आया I उन दिनों छोटे कादर खान के पास इतने पैसे तक नहीं हुआ करते थे कि वह चप्पल पहन सके, और जब रिहर्सल के लिए वह थिएटर जाने लगे तो वहां अशरफ खान को कादर खान पर इतनी दया आई, कि उन्होंने कादर खान के लिए नए कपड़े और चप्पल तक खरीद लिए I
इस तरह से अपने पढ़ाई के साथ-साथ Kader Khan नाटकों में छोटे-बड़े रोल भी करने लगे थे, और कुछ पैसे भी जमा होने लगे I खान जब थोड़ा बड़े हुए तो वह खुद भी नाटक के स्क्रिप्ट लिखना शुरू किया, और अब तक तो यह जाने माने थिएटर आर्टिस्ट प्रमोद जोशी के साथ मिलकर कई नाटक लिख चुके थे, और उस नाटक में काम भी कर चुके थे I
थिएटर नाटक में काम करके और नाटक लिखकर पैसे जमा करके कादर खान ने मुंबई के इस्माईल युसूफ कॉलेज में अपना एडमिशन कर लिया और अपना ग्रेजुएट भी कंप्लीट कर लिया, और इसके बाद सिविल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन कंप्लीट कर लिया, और मुंबई यूनिवर्सिटी कॉलेज में प्रोफेसर बन गए, और ₹300 महीना उनकी तनख्वाह थी I कादर खान ने 1970 से लेकर 1975 तक मुंबई यूनिवर्सिटी में पढ़ाया I
उन दिनों कादर खान का एक फेमस ड्रामा था “लोकल ट्रेन” जो की All India Drama Competition में शामिल हुआ और इसकी वजह से कादर खान को बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर, बेस्ट राइटर का अवार्ड भी मिला, और इसी के साथ ₹1500 भी मिले उन दिनों यह रकम हजारों और लाखों के बराबर थी I
कादर खान ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि “लोकल ट्रेन” इस ड्रामा को देखने के लिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बहुत से दिग्गज कलाकार पहुंचे थे, और इस ड्रामा के जज फिल्मी हस्ती नरेंद्र बेदी ने कादर खान को अपने आने वाली फिल्म में स्क्रिप्ट लिखने का ऑफर दिया I
यहीं से इन्हें साल 1972 में आई फिल्म “जवानी दीवानी” में काम करने का मौका मिला, फिल्म जवानी दीवानी के डायलॉग लिखने के लिए कादर खान को ₹1500 मिले और यह रकम देखकर कादर खान की खुशी सातवें आसमान पर पहुंच गई थी I यह फिल्म न सिर्फ सफल हुई बल्कि इस फिल्म ने कादर खान के कलम के लिए आगे के रास्ते भी खोल दिए, एक फिल्म में डायलॉग लिखने के ₹1500 मिलने पर कादर खान ने कलम की ताकत को पहचाना I
छोटे-मोटे नाटक की स्क्रिप्ट और एक फिल्म के डायलॉग लिखने पर थोड़े पैसे इकट्ठा कर गरीबी से थोड़ा राहत मिली थी, पर अफसोस कि इन्हें अपने सौतेले पिता से छुटकारा नहीं मिला था, जब यह 24 साल के थे तब एक दिन कादर खान के सौतेले पिता ने उन्हें इस कदर पीटा और गालियां दी कि अत्याचार के सारी हद्दे पर कर दी उस वक्त कादर खान ने घर छोड़कर हॉस्टल में जाकर रहने लगे, वह अपने मां से बहुत प्यार करते थे और वह हमेशा अपनी मां से मिलने चोरी छुपे आते थे I
एक बार यह एक थिएटर में नाटक कर रहे थे और इनका यह नाटक पहले से ही मशहूर नाटक था, इस नाटक के लिए चीफ गेस्ट के तौर पर ट्रेजेडी किंग दिग्गज अदाकार Dilip Kumar साहब को बुलाया गया था, दिलीप साहब ने कहीं से Kader Khan के थिएटर का नंबर लिया और उनसे फोन कर कहा कि “तुम्हारा नाटक के बारे में खूब सुना है, और आज मैं देखने आऊंगा” I
बेबाक कादर खान ने बिना कुछ सोचे समझे यह कहा कि ठीक है नाटक शुरू होने से 20 मिनट पहले आइएगा, खत्म होने के बाद ही जाएगा कादर खान की बात दिलीप साहब ने काबुल की I दिलीप साहब ने कादर खान का पूरा नाटक देखा और वह उनके नाटक से इतना प्रभावित हुए कि अपनी आने वाली 2 फिल्में “बैराग” और “सगीना” के लिए साइन कर लिया I
अब धीरे-धीरे कादर खान को फिल्मों में एक लेखक के तौर पर काम मिलना शुरू हुआ था, कादर खान के काम से प्रभावित होकर फिल्म मेकर रवि टंडन ने अपने आने वाली फिल्म “खेल-खेल में” इस फिल्म के डायलॉग लिखने को कहा और फिल्म के रिलीज से पहले ही कादर खान के काम के लिए ₹20,000 भी दे दिए, कादर खान के दिन अब बदल चुके थे I
तो एक बार उस दौर के फिल्म मेकर मनमोहन देसाई ने कादर खान का एक टेस्ट लिया, कादर खान के स्क्रिप्टिंग से Manmohan Desai इतने आकर्षित हुए कि, अपना सोने का ब्रेसलेट उतार कर कादर खान के कलाई पर बांध दिया, और वहीं पर तुरंत कादर खान को अपनी एक फिल्म के लिए साइन कर लिया I
उस वक्त मनमोहन देसाई ने उनसे पूछा कि तुम एक फिल्म के डायलॉग लिखने के लिए कितने पैसे लेते हो उस वक्त कादर खान ने कहा पिछली फिल्म के लिए मुझे ₹20,000 मिले थे, आप एक कम कीजिए ₹25,000 दीजिए I उस वक्त बड़ा दिल दिखाते हुए Manmohan Desai ने कहा कि मेरा राइटर इतना सस्ता तो नहीं हो सकता, और उसी वक्त फौरन 125,000 का चेक दे दिया I चेक देखकरKader Khan हैरान हो गए, किए उनके साथ क्या हो रहा है और वह फिल्म थी “रोटी”, उसके बाद कादर खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, और एक के बाद एक कामयाबी की सीढ़ियां वह चढ़ते गए I
कादर खान ने उस दौर के लगभग सभी बड़े स्टार के साथ डायलॉग लिखे, और जिनमें से ज्यादातर फिल्में सुपरहिट साबित हुई I जो लोग कादर खान के काम को नहीं जानते उन्हें यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि अमिताभ बच्चन की फिल्म “शराबी, कुली, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथोनी इन सभी फिल्मों के डायलॉग कादर खान साहब नहीं लिखे हैं I
तो वही फिल्म अग्निपथ और नसीब के स्क्रीनप्ले भी कादर खान ने लिखे हैं I यह वही फिल्में हैं जिन्होंने अमिताभ बच्चन को इतनी शोहरत दिलवाई की फिल्मों में उनके कहे गए डायलॉग नौजवान तो क्या बच्चों तक के जुबान पर चढ़ गए I इसके अलावा भी कादर खान ने उस दौर के सभी बड़े स्टार के लिए डायलॉग लिखे, और यह सिलसिला सालों तक चलता रहा I स्टाइल आइकन Feroz Khan साहब और गोविंदा जैसे बड़े नाम के लिए दर्जनों फिल्मों में डायलॉग लिखने के लिए कादर खान खूब मशहूर हुए I
इसके बाद इन्होंने गोविंदा की फिल्म कुली नंबर वन और अजय देवगन की फिल्म हिम्मतवाला, सैफ अली खान और अक्षय कुमार की फिल्म मैं खिलाडी तू अनाड़ी के सुपरहिट डायलॉग भी कादर खान साहब नहीं लिखे हैं तो वही कानून अपना अपना, खून भरी मांग, कर्म, सल्तनत आमिर खान की फिल्म सरफरोश, जस्टिस चौधरी,धरम वीर जैसे सुपरहिट फिल्मों के डायलॉग भी कादर खान साहब ने ही लिखे हैं I इन फिल्मों से आप कादर खान के कलाम के ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं I
Kader Khan का फिल्मों में अभिनय का सफर :
साल 1973 में कादर खान साहब ने फिल्मों में अभिनय करने की शुरुआत की, दरअसल काका उर्फ अदाकार राजेश खन्ना ने कादर खान के साथ कुछ नाटक में काम किया था, और काका के कहने पर ही फिल्म दाग में अदाकार के तौर पर पहली बार मौका मिला, उसके बाद साल 1981 में फिल्म नसीब में काम किया और इस फिल्म में कई बड़े अदाकार शामिल थे I
फिर 1982 में Kader Khan ने अमिताभ बच्चन के साथ एक बार फिर से वापसी की और वह फिल्म थी सत्य पर सत्ता I इसके बाद 1983 में कादर खान ने चार फिल्मों में नजर आए, मावली, जस्टिस चौधरी, जानी दोस्त और हिम्मतवाला जैसे फिल्मों में काम किया I
1984 में कादर खान के फिल्मों की गिनती और बढ़ गई जिनमें से मुख्य फ़िल्में रहीनया कदम, कैदी, मकसद, तोहफा और इंकलाब जैसे फिल्में शामिल थी I इसके बाद 1985 में कादर खान ने मास्टर जी, सरफरोश, बलिदान, मेरा जवाब और पत्थर दिल जैसे फिल्मों में काम किया, इसके बाद 1986 में कादर खान के मुख्य फ़िल्में रही इंसाफ की आवाज, धर्म, अधिकारी, घर संस्कार और आग और शोला I
साल 1987 में कादर खान की फिल्में रहीवतन के रखवाले, सिंदूर, खुदगर्ज, औलाद, जवाब हम देंगे और अपने-अपने I 1988 में इंतेक़ाम, बीवी हो तो ऐसी, वक्त की आवाज, घर घर की कहानी, कसम, मुलजिम, दरिया दिल, और प्यार और सोने पर सुहागा यह फिल्में रिलीज हुई, 1989 में उनके खास फिल्में रहे चालबाज, कानून अपना अपना, काला बाजार, जैसी करनी वैसी भरनी, कानूनी और वर्दी I
1990 में Kader Khan ने जिस खास फिल्मों में काम किया वह थी,अपमान की आग, जवानी जिंदाबाद, घर हो तो ऐसा, किशन कन्हैया, बाप नंबरी बेटा 10 नंबरी, जैसी फिल्में शामिल रही, इसके बाद साल 1991 में सजना, कर्ज चुकाना है, खून का कर्ज, हम और प्यार का देवता जैसे फिल्में खास रही I
साल 1992 में कादर खान ने अंगार, बोल राधा बोल, सूर्यवंशी और दौलत की जंग, जैसे फिल्मों में काम किया, और साल 1993 में शतरंज, धनवान, औलाद के दुश्मन, दिल तेरा आशिक, रंग, आशिक आवारा, आंखें और दिल ही तो है जैसे खास फिल्मों का हिस्सा रहे I
साल 1994 में घर की इज्जत, इना मीनाडीका, आतिश, साजन का घर, अंदाज, खुद्दार और राजा बाबू जैसे फिल्मों में काम करते नजर आए, 1995 में Kader Khan ने हलचल, कूली नो 1, तकदीरवाला, मैदान-ए-जंग और यह है इंडिया जैसे फिल्मों में अभिनय करते नजर आए, 1996 में कादर खान ने साजन चले ससुराल छोटे सरकार, रंगबाज और सपूत जैसे फिल्मों में जबरदस्त अभिनय करते हुए नजर आए I इसके बाद के कुछ सालों की फिल्में
| साल | फिल्म | भूमिका (टाइप) |
| 1997 | Mr. and Mrs. Khiladi | कॉमेडी / सपोर्टिंग |
| 1997 | Deewana Mastana | कॉमेडी |
| 1997 | Judaai | सपोर्टिंग |
| 1997 | Hero No. 1 | कॉमेडी |
| 1997 | Judwaa | कॉमेडी |
| साल | फिल्में | प्रकार |
|---|---|---|
| 1998 | Bade Miyan Chote Miyan, Dulhe Raja, Gharwali Baharwali, Aunty No. 1 | सभी कॉमेडी |
| 1999 | Haseena Maan Jaayegi, Sirf Tum, Raja Ji, Aa Ab Laut Chalen, International Khiladi | कॉमेडी + सपोर्टिंग |
| 2000 | Dhadkan, Joru Ka Ghulam, Kunwara | मिक्स |
| 2001 | Ittefaq | सपोर्टिंग |
| 2002 | Jeena Sirf Merre Liye, Badhaai Ho Badhaai | मिक्स |
| 2003 | Parwana | सपोर्टिंग |
| 2004 | Mujhse Shaadi Karogi, Suno Sasurjee | कॉमेडी |
| 2005 | Lucky: No Time for Love | सपोर्टिंग |
Kader Khan ने इन फिल्मों में जबरदस्त अभिनय किया I
Kader Khan साहब ने 1970 के दशक से लेकर 2017 तक 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, और 250 से ज्यादा फिल्म के लिए डायलॉग लिखे, कादर खान साहब की यह तो बस चंद खास फिल्मों की सूची है Kader Khan साहब के सारी फिल्मों के बारे में एक ब्लॉग में बताना थोड़ा मुश्किल है I
साल 2017 के बाद Kader Khan साहब की तबीयत थोड़ा खराब रहने लगी जिसकी वजह से उन्होंने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया, हालांकि उनकी आगे के सालों में एक दो फिल्में आती रही I खान साहब ने छोटे पर्दे पर कुछ टीवी सीरियल्स में भी काम किया है, जैसे हंसना मत, Mr धनसुख, हाय पड़ोसी कौन है दोषी, 2012 Movers and Shakers टीवी सीरियल कॉफी मशहूर रहा, कादर खान साहब ने 1981 में फिल्म “शमा” प्रोड्यूस भी की थी I
कादर खान साहब के लोकप्रियता का अंदाजा अब इस बात से लगा सकते हैं कि 1977 में रिलीज हुई फिल्म परवरिश में मुख्य किरदार के रूप में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना थे, लेकिन इस फिल्म में खलनायक की भूमिका में कादर खान साहब को इतनी सराहना और लोकप्रियता मिली कि आने वाले कुछ सालों तक अमिताभ बच्चन को सुप्रीमो के नाम से पहचान गया क्योंकि सुप्रीमो यह Kader Khan साहब का इस फिल्म में खलनायक के किरदार का नाम था I
बतौर कॉमेडियन खान साहब के फिल्मों का ऐसा क्रेज रहा कि 90 के दशक में लोग प्यार की कहानी को देखने के बजाय कादर खान साहब की कॉमेडी देखने थिएटर जाया करते, खासकर शक्ति कपूर के साथ कादर खान साहब की जोड़ी बहुत कामयाब रही I
आज भी दर्शक उनके कॉमेडी को खूब पसंद करते हैं और उन्हें देखना भी पसंद करते हैं I 90 का दशक यही वह दौर था जब Kader Khan पर डबल मीनिंग और अश्लील डायलॉग लिखने का इल्जाम लगा, हालांकि इस पर यह बात भी सामने आई ऐसे डायलॉग लिखने के लिए फिल्म मेकर्स ने खान साहब को मजबूर किया करते थे, ताकि दर्शकों का ध्यान अपनी फिल्मों की और आकर्षित कर सके I
Kader Khan की Personal Life :
Kader Khan साहब की शादी अजरा खान नाम की एक लड़की से हुई, इसे इन्हें तीन बेटे हुए Sarfaraz Khan, Shahnawaz Khan, और Abdul Quddus Khan I Sarfaraz Khan अपने पिता की तरह ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अदाकार बने, लेकिन बाद में फिल्मों को अलविदा कह दिया, और शाहनवाज खान एक निर्देशक बने, और अब्दुल कुड्डूस कनाडा में रहते हैं, जिसकी वजह से कादर खान को कनाडा की भी नागरिकता ले ली थी I
साल 2014 में Kader Khan ने मक्का शरीफ की हज का सफर भी किया था, जहां पर जाना हर मुसलमान की ख्वाब होता है I खान साहब ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरे बच्चों पर नेगेटिव इंपैक्ट ना पड़े इसके लिए मैंने फिल्मों में खलनायक के किरदार में मुझे हासिल हुई कामयाबी को छोड़कर कॉमेडी करने का फैसला किया था I
Kader Khan को मिले Awards :
Kader Khan को साल 1982 में बने फिल्म मेरी आवाज सुनो के डायलॉग राइटिंग के लिए, और 1991 की फिल्म बाप नंबरी बेटा दस नंबर में बेस्ट कॉमेडियन के लिए 1993 में फिल्म अंगार के डायलॉग राइटिंग के लिए Filmfare Awards का अवार्ड मिला I साल 2004 में भी बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए फिल्म फेयर की पुरस्कार की तरफ से सम्मानित किया गया I
Kader Khan 9 बार बेस्ट कॉमेडियन के लिए फिल्म फेयर अवार्ड की तरफ से नॉमिनेट हुए, तो इसी के साथ साल 2013 में भी हिंदी साहित्य जगत में अभूतपूर्व योगदान के लिए साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया I उनके क़रीबी बताते हैं कादर खान के अखीरी 15,20 साल सही नहीं रहे, यह इनका फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बुरा दौर रहा, करियर के इस ढलते दौर में अपने पुराने दोस्त अमिताभ बच्चन से भी जलिल होना पड़ा I
एक वक्त ऐसा था कि Kader Khan के लिखे हुए डायलॉग की वजह से अमिताभ बच्चन घर-घर मशहूर हुए थे, लेकिन अमिताभ ने बहुत सी फिल्मों से कादर खान को बाहर कर दिया, एक इंटरव्यू में कादर खान ने इसकी वजह बताई थी कि उन्होंने किसी फिल्म के सेट पर कुछ लोगों के सामने अमिताभ बच्चन को सर जी कहकर पुकारा नहीं, सर जी कहकर सम्मान नहीं दिया जिसकी वजह से अमिताभ उन पर भड़क गए और उन्हें बहुत सी फिल्मों से निकाल दिया I
फिर एक लंबे ब्रेक के बाद एक कॉमेडी शो से Kader Khan छोटे पर्दे पर वापसी की, तो सोशल मीडिया द्वारा अमिताभ बच्चन ने ट्वीट करते हुए उन्हें बधाई दी थी, तो वही कादर खान और अदाकारा अनुपम खेर के बीच छोटी-मोटे नोक झोक की खबरें सामने आती रही, लेकिन जब अनुपम खेर को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया, कादर खान का नाम उसमें शामिल नहीं था, तब इन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के अंदर चाटुकारिता के दुष्प्रभाव पर अपने राय रखी थी, और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनुपम खेर के खास रिश्ते का भी जिक्र किया था I
जीते जी ना सही लेकिन Kader Khan साहब के इंतकाल के बाद साल 2019 में हिंदुस्तान के चौथी सबसे बड़े पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया गया, इनके इंतकाल के बाद उनके बेटे सरफराज खान ने उस पुरस्कार को कबूल किया था I
Kader Khanकी मौत :
अपने आखिरी वक्त में Kader Khan घुटने की बीमारी से काफी झूलते रहे, और साल 2015 में रिलीज हुई उनकी आखिरी फिल्म “हो गया दिमाग का दही” के प्रमोशन के दौरान इन्हें व्हीलचेयर पर देखकर बहुत तकलीफ हुई थी, दर्शक काफी भावुक हुए थे I साल 2015 में अपने जोड़ों के लिए हरिद्वार में स्थित पतंजलि योगपीठ में एडमिट हुए लेकिन उसे कोई फायदा नहीं हुआ I
जिसके बाद अपने घुटने के ऑपरेशन के लिए वह अपने बेटे के पास कनाडा चले गए, लेकिन अफसोस की वहां पर भी इनका ऑपरेशन असफल रहा जिसके चलते यह Supranuclear Palsy जैसी बीमारी से गिर गई I यह बीमारी एक प्रकार से आपके दिमाग का भ्रम है, जो आपके अन्य शरीर के अंगों को प्रभावित करती है, जैसे कि आपके हाथ, पैर, आंख, नाक और दिमाग पर आपका कोई कंट्रोल नहीं रहता, इसी वजह से आखरी कुछ साल कादर खान साहब को देखने, बोलने, सुनने, चलने और समझने में मुश्किल आने लगी I
हर जगह इलाज करने के बावजूद भी यह बीमारी ठीक नहीं हुई, 28 दिसंबर 2018 को सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से कनाडा के अस्पताल में भर्ती हुए, इलाज के दौरान Kader Khan साहब अपने सबसे छोटे बेटे और बहू के साथ कनाडा में रह रहे थे, और उन्होंने कनाडा में रहने के लिए वहां की नागरिकता भी ले ली थी I अस्पताल में भर्ती होने के 2 दिन बाद यानी की 31 दिसंबर 2018 को बीमारी से जूझते हुए 81 की उम्र में Kader Khan साहब का इंतकाल हो गया, खान साहब के इंतकाल की खबर सोशल मीडिया पर उनके सबसे बड़े बेटे सरफराज खान ने दी थी I
कनाडा में स्थित मस्जिद ISNA Mosque in Mississauga में उनका अंतिम दर्शन का कार्यक्रम रखा गया था, और ब्रैम्पटन के मीडोवेल कब्रिस्तान मैं उन्हें दफन किया गया I पर अफसोस की हिंदुस्तान से Kader Khan साहब को बेहद मोहब्बत थी उस हिंदुस्तान के सर जमीन में दफन होने का सुकून ना मिल सका, जिसका मलाल शायद उन्हें भी रहा होगा, और उनके चाहने वालों को भी I
तो इस तरह से रंगमंच और हिंदुस्तान की फिल्म इंडस्ट्री का एक बेहद ही शानदार और बेमिसाल अदाकार के जिंदगी का सफर रुक गया, और एक नायाब सितारा इस दुनिया को अलविदा कह छोड़ गया, लेकिन इन्होंने अपने पीछे छोड़ गए बेहद ही खूबसूरत और बेमिसाल काम जो रहती दुनिया तक सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में प्रदर्शित किए जाएंगे I फिल्मों में लिखे गए Kader Khan साहब के डायलॉग, कॉमेडी और उनके हर एक अंदाज को उनके चाहने वाले कभी भुला नहीं पाएंगे, इस महान और बेमिसाल अदाकार को दिल से सलाम I
तो यह थी दोस्तों अफगानिस्तान के जमीन से उठकर हिंदुस्तान के हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने अल्फाजों और शानदार डायलॉग से मशहूर और कामयाब अपनी बेमिसाल अदाकारी से लाखों हिंदुस्तानियों के दिल पर राज करने वाले दिग्गज अदाकार Kader Khan साहब के जिंदगी का सफर I