ACCIDENT PRIME MINISTER OF INDIA जिन्होंने देश को कंगाल होने से बचाया…Dr. Manmohan Singh

  ACCIDENT PRIME MINISTER OF INDIA जिन्होंने देश को कंगाल होने से बचाया… Dr. Manmohan Singh और अपने सादगी, निष्ठा और अद्भुत नेतृत्व से हिंदुस्तान को एक नई दिशा दी, एक ऐसे नेता जिन्होंने गरीबों के लिए ऐसे योजनाएं लागू की जिससे लाखों करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल गई, चाहे वह MANREGA हो जिसने भारत ग्रामीण को रोजगार की गारंटी दी I या फिर खाद्य सुविधा अधिनियम जिसे गरीब परिवारों को सस्ते दरों पर राशन दिलवाया I

शिक्षा के अधिकार में हर बच्चे को स्कूल जाकर शिक्षा प्राप्त करने का हक दिलवाया, तो वही Bhumi Adhigrahan नियम यानी की Land Acquisition एक्ट 2013 में हिंदुस्तान के किसानों को उनके अधिकारों को सुरक्षा दी, लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी हिंदुस्तान के अर्थव्यवस्था को आर्थिक संकट से बाहर निकलना I 

   साल 1991 में जब भारत गंभीर आर्थिक संकट में डूबा हुआ था, विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो रहा था, और देश पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा था, उस वक्त वित्त मंत्री के रूप में ji ने आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की उनके कार्य नीति में भारत को लाइसेंसी राज मुक्त किया I विदेशी निवेश को आकर्षित किया और देश के अर्थव्यवस्था को पटरी पर ले आए I

इसके बाद जब साल 2008 में वैश्विक आर्थिक मंदी ने America और Europe जैसे बड़े देशों के अर्थव्यवस्था को भी हिला कर रख दिया था, उस वक्त प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी ने भारत को आर्थिक संकट से बचाया I Dr. Manmohan Singh की समझदार भारी आर्थिक नीतिओं के कारण भारत उस समय दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने आर्थिक मंदी होने के बावजूद अपने विकास को बनाए रखा I 

आज हम जानेंगे हिंदुस्तान के 13 वे प्रधानमंत्री Dr. Manmohan Singh ji के बारे में जिन्हें लोग ACCIDENT PRIME MINISTER, मौन और Silent प्रधानमंत्री के नाम से जानते हैं, 26 सितंबर 1932 को ब्रिटिश भारत के पंजाब में मनमोहन सिंह का जन्म हुआ, उनके पिता का नाम Gurmukh Singh था और उनके माता Amrit Kaur थी I

जब वे बहुत छोटे थे, तभी Dr. Manmohan Singh ji की माँ का देहांत हो गया, उनका पालन-पोषण उनकी नानी जमना देवी ने किया, जिनके वे बहुत करीब थे। सिंह के शुरुआती पढ़ाई एक स्थानीय गुरुद्वारे में हुई, और यहां उन्होंने उर्दू और पंजाबी की पढ़ाई शुरू की I

  17 अप्रैल 1937 को उन्हें स्थानीय सरकारी प्राथमिक स्कूल में एडमिशन मिला, और यहां Dr. Manmohan Singh ने 10 साल की उम्र से यानी चौथी तक अपने उर्दू माध्यम की शिक्षा जारी रखी, इसके बाद वह और उनके परिवार पाकिस्तान के पेशावर चले गए, वहां Dr. Manmohan Singh ji को उच्च प्राथमिक और खालसा स्कूल में एडमिशन मिला I

Dr. Manmohan Singh ने 1947 की गर्मियों में मैट्रिक की परीक्षा दी I कई सालों बाद जब वह प्रधानमंत्री बने, तब Dr. Manmohan Singh ने अपने हिंदी भाषण उर्दू लिपि में लिखते थे। हालांकि वह कभी-कभी गुरुमुखी भाषा का भी उपयोग करते थे, जो उनकी मातृभाषा पंजाबी लिखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लिपि थी I

 हिंदुस्तान पाकिस्तान के बंटवारे के बाद Dr. Manmohan Singh का परिवार भारत चला आया, 1948 में वह अमृतसर चले गए, जहां उन्होंने हिंदू कॉलेज अमृतसर में पढ़ाई की, सिंह ने पंजाबी विश्वविद्यालय जो उस वक्त होशियारपुर में था, विश्वविद्यालय से Dr. Manmohan Singh जी ने Graduate और Postgraduate लेवल की पढ़ाई की, बाद में वह इंग्लैंड में Cambridge University पढ़ने गए और यहां पर उन्होंने PHD की I  

फिर Dr. Manmohan Singh ने इंग्लैंड में ही Oxford University से D. Phil भी किया, उनकी किताब {India’s Export Trends and Prospects for Self-Sustained Growth} इंडियाज़ एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रॉस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ I

यह Dr. Manmohan Singh जी द्वारा लिखी गई महत्वपूर्ण किताब है, जो हिंदुस्तान के निर्यात रुझानों और आत्मनिर्भर विकास की संभावनाओं को विशेषण करती है, और यह किताब ऑक्सफोर्ड के क्लेरिड और प्रिंस द्वारा 1964 में प्रकाशित की गई थी, भारत के आर्थिक वृद्धि में निर्यात की भूमिका पर प्रकाश डालती है I डॉ सिंह ने अर्थशास्त्र के अध्यापक के तौर पर काफी प्रतिष्ठा हासिल की I 

Dr. Manmohan Singh जी ने पंजाब यूनिवर्सिटी और बाद में प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स School of Economics में professor रहे, इसी दौरान वह संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन सचिवालय में सह सलाहकार भी रहे, इसके बाद 1987 से लेकर 1990 में जेनेवा यानी स्विट्जरलैंड के ज्यूरिक के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जैस मे Dr. Manmohan Singh जी साउथ कमीशन में सचिव भी रहे I

1971 में Dr. Manmohan Singh जी भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किए गए I इसके 1 साल बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया, इसके बाद के सालों में वह योजना आयोग के उपाध्यक्ष बने, और Reserve Bank of India के गवर्नर और इसी के साथ प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार बने I

इसी के साथ Dr. Manmohan Singh विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे, 1991 से 1996 के दशक में जब डॉ सिंह ने भारत के Finance Minister यानी वित्त मंत्री रहे, तब भारत के आर्थिक इतिहास के सालों में सबसे महत्वपूर्ण मोड आया I 

Dr. Manmohan Singh ji का राजनीतिक जीवन : 

1985 में जब Shri Rajiv Gandhi की सरकार थी तब Dr. Manmohan Singh जी को भारतीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद के तौर पर चुना गया, और अध्यक्ष पद पर उन्होंने 5 सालों तक काम किया, और 1990 में यह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार भी थे I

P. V. Narasimha Rao प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने डॉ. सिंह जी को वित्त मंत्रालय का स्वतंत्र भार सौंप दिया, जब कि इस दौरान Dr. Manmohan Singh जी ना तो लोकसभा सदस्य थे, और ना ही राज्यसभा के सदस्य थे, लेकिन किसी भी मंत्री को संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार संसद का सदस्य होना बहुत जरूरी होता है, और इसीलिए 1991 में असम से राज्यसभा के लिए डॉ सिंह जी को चुना गया I 

Dr. Manmohan Singh ने आर्थिक उदारीकरण को समाधान के रूप में पेश किया, और भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार के साथ जोड़ दिया, और उन्होंने आयात और निर्यात यानी Import Export को भी आसन बनाया I लाइसेंस और परमिट यह गुजरे जमाने की चीज हो गई है, अपनी निजी पूंजी को प्रोत्साहित करके बीमार और घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को पुनर्जीवित करने के लिए अलग से नीतियां डेवलप कि I 

जब नई अर्थव्यवस्था घुटनों पर चल रही थी तब P. V. Narasimha Rao को कठोर आलोचना का शिकार होना पड़ा, और विपक्ष उन्हें नये आर्थिक प्रयोग के प्रति सटक कर रहा था, और तब राव ने सिंह जी पर पूरा विश्वास रखा, और सिर्फ दो सालों में ही आलोचकों के मुंह बंद हो गए, और उनकी आंखें फैल गई, और इस तरह से एक गैर-राजनेता जो अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे, उन्होंने देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारतीय राजनीति में प्रवेश किया।

Dr. Manmohan Singh ji को मिले हुए पद : 

सबसे पहले Dr. Manmohan Singh जी पंजाब यूनिवर्सिटी और बाद में दिल्ली School of Economics में प्रोफेसर के पद पर थे, और 1971 में सिंह भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में शामिल हुए I

इसके बाद साल 1972 में Dr. Manmohan Singh जी ने वित्त मंत्रालय में Chief Economics Advisor  बने, इसके अलावा वित्त मंत्रालय में सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के सलाहकार और University Grants Commission के अध्यक्ष और साल 1991 में राज्यसभा के सदस्य भी रहे I 

वह 1998 से 2004 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे, Dr. Manmohan Singh जी ने पहली बार 72 साल की उम्र में 22 मे 2004 को भारत गणराज्य के 13वें प्रधानमंत्री बने और प्रधानमंत्री के कार्यकाल की शुरुआत कि, जो अप्रैल 2009 में कामयाबी के साथ पूरा हुआ I

इसके बाद लोकसभा के चुनाव हुए, और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अग्रणी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन फिर से कामयाब हुआ, और फिर एक बार डॉ सिंह जी दोबारा प्रधानमंत्री के पद पर विराजमान हुए I 

अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सिंह जी ने वित्त मंत्री के रूप में P. Chidambaram को अर्थव्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी, और जिसे उन्होंने बड़ी ही कुशलता और चतुराई के साथ निभाया, इसी के साथ 2009 की वैश्विक व्यापार मंदी का प्रभाव भारत में भी महसूस किया गया। लेकिन भारत के बैंकिंग व्यवस्था का आधार मजबूत होने के वजह से उतना नुकसान नहीं उठाना पड़ा, जितना अमेरिका और दूसरे देशों को उठाना पड़ा I 

26 नवंबर 2008 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर पाकिस्तान के जरिए से आतंकियों ने हमला किया, 26-11-2008 में हुए उस हमले की वजह से पूरा देश में डर का माहौल था, और उस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था I उस वक्त Shivraj Patil गृहमंत्री थे, इस आतंकी हमले के बाद सिंह ने Shivraj Patil को हटाकर गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी P. Chidambaram को सौंप दी, और Pranab Mukherjee को नया वित्त मंत्री बनाया।

Dr. Manmohan Singh ji को मिले पुरस्कार और सम्मान : 

साल 1987 में उपरोक्त पद्म विभूषण के अलावा डॉ. सिंह जी को भारत के सार्वजनिक जीवन में अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुछ प्रमुख यह है : 

2002 – सर्वश्रेष्ठ सांसद (Outstanding Parliamentarian Award)

  • भारतीय संसद द्वारा संसदीय मर्यादा, व्यवहार और नीति-निर्धारण में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।

1993 और 1994 – एशिया मनी अवार्ड फॉर फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर

  • भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने और उदारीकरण की नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।
  • एशिया मनी पत्रिका ने उनके वित्तीय नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों को मान्यता दी।
  • 1994 – यूरो मनी अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर
  • ब्रिटेन की प्रसिद्ध पत्रिका Euro Money ने उन्हें यह पुरस्कार भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर और विकसित करने के लिए दिया।
  • 1995 – इंडियन साइंस कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय विकास के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • 1956 – कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का एडम स्मिथ Adam Smith पुरस्कार
  • अर्थशास्त्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डॉ. मनमोहन सिंह को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • यह पुरस्कार कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा उन छात्रों को दिया जाता है जिन्होंने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विशेष योग्यता दिखाई हो।


इन सबके अलावा भी Dr. Manmohan Singh जी ने अपने जीवन में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वे 1991 से राज्य सभा के सदस्य रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने 1998 और 2004 की संसद में विपक्ष के नेता के रूप में भी कार्य किया।

विवाद और घोटाले : 

2G spectrum scam भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, इस घोटाले की वजह से विपक्ष के भारी दबाव के चलते Dr. Manmohan Singh जी सरकार में संचार मंत्री A. Raja को न सिर्फ अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ा, और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में प्रधानमंत्री Dr. Manmohan Singh जी की खामोशी पर भी सवाल उठाए I

इसके अलावा 2G spectrum scam Dr. Manmohan Singh जी की सरकार भी जांच के दायरे में आई, जब Nira Radia ने पत्रकारों, राजनेताओं और उद्योगपतियों से आवंटन के लिए ए. राजा को संचार मंत्री नियुक्त करने की पैरवी के बारे में बात की।

कोयला आबंटन घोटाला : 

Dr. Manmohan Singh जी के सरकार के दौरान देश में कोयला आवंटन के नाम पर लगभग 26 लाख करोड रुपए की चोरी हुई, इस महा घोटाले का राज कैप्टिव ब्लॉक है, जिसमें निजी क्षेत्र को उनकी इच्छानुसार ब्लॉक आवंटित कर दिया गया।

इस कैप्टिव ब्लॉक नीति का हिंडाल्को, जेपी पावर, जिंदल पावर, जीवीके पावर और एस्सार जैसी कंपनियों के जरिए से खूब फायदा उठाया गया, जो स्वयं प्रधानमंत्री  Dr. Manmohan Singhजी के दिमाग की उपज थी। 

Dr. Manmohan Singh ji की विदेश नीति : 

Dr. Manmohan Singh जी ने पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा शुरू की गई और भारतीय जनता पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा जारी रखी गई व्यावहारिक विदेश नीतियों को जारी रखा, उन्होंने अपने पूर्ववर्ती अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया को जारी रखा I

उनके कार्यकाल में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय यात्राएँ हुईं, Dr. Manmohan Singh जी के कार्यकाल के दौरान, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास किए गए, नवंबर 2006 में चीन के राष्ट्रपति Hu Jintao ने भारत का दौरा किया, इसके बाद जनवरी 2008 में Dr. Manmohan Singh जी ने बीजिंग का दौरा किया, भारत चीन संबंधों में एक प्रमुख विकास 4 दशकों से अधिक समय तक बंद रहने के बाद 2006 में नाथूला दर्रा को फिर से खोलना था I

People’s Republic of China की स्टेटस काउंसिल के प्रधानमंत्री ने 19 से 21 में 2013 तक भारत दिल्ली मुंबई के राजकीय दौरा किया I उसके बाद सिंह जी ने 22 से 24 अक्टूबर 2013 तक चीन के आधिकारिक दौरा किया, दिल्ली बीजिंग, कोलकाता कुनमिंग,और बैंगलोर चेंगदू के बीच सिस्टर सिटी साझेदारी स्थापित करने के लिए तीन समझौते पर हस्ताक्षर किए, 2010 तक पीपल रिपब्लिक आफ चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था I 

अफगानिस्तान के साथ संबंधों में काफी सुधार हुआ, भारत अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान का सबसे बड़ा क्षेत्रीय दाता बन गया है, अगस्त 2008 में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति Hamid Karzai की नई दिल्ली दौरा के दौरान Dr. Manmohan Singh जी ने अधिक स्कूलों, स्वास्थ्य क्लिनिको, बुनियादी ढांचे और रक्षा के विकास के लिए अफगानिस्तान को सहायता पैकेज में वृद्धि की, Dr. Manmohan Singh के नेतृत्व में भारत अफगानिस्तान के सबसे बड़ा सहायता दाताओं में से एक के रूप में उभरा I

Dr. Manmohan Singh जी के सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों की दिशा में काम किया, उन्होंने जुलाई 2005 में भारत अमेरिका असाया परमाणु समझौते पर बातचीत शुरू करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा किया I

इसके बाद मार्च 2006 में George W. Bush की भारत की सफल यात्रा हुई, जिसके दौरान परमाणु समझौते पर घोषणा की गई जिससे भारत को अमेरिकी परमाणु ईंधन और तकनीक तक पहुंच मिल गई, जबकि भारत को अपने आसन में परमाणु रिएक्टर के IAEA निरीक्षण की अनुमति देने होगी I

2 साल से अधिक समय तक और बातचीत के बाद परमाणु आपूर्ति करता समूह और अमेरिका कांग्रेस से मंजूरी के बाद भारत और अमेरिका ने 10 अक्टूबर 2008 को प्रणब मुखर्जी के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए, Dr. Manmohan Singh जी ने अमेरिका के राष्ट्रपति Barack Obama के प्रशासन के दौरान White House की पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा नवंबर 2009 में पूरी कि I 

साल 2009 में Dr. Manmohan Singh जी उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने ब्रिक्स की नींव रखी थी, इस समूह की बुनियाद को अक्सर उभरते आर्थिक शक्ति के प्रदर्शन के रूप में वर्णित किया जाता है I Dr. Manmohan Singh जी जब दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, साल 2012 में दिल्ली सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद तब Dr. Manmohan Singh ने शांति की अपील की I

जोर देकर कहा कि, “हिंसा से कोई फायदा नहीं होगा” टेलीविजन संबोधन में उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मैं हर वह संभव प्रयास करूँगा, Dr. Manmohan Singh ने सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि, तीन बेटियों का पिता होने के नाते मैं इस घटना के बारे में आप सभी की तरह ही गहरी भावना रखता हूं, पीड़िता को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री Dr. Manmohan Singh ने नए साल के जश्न के अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रम को रद्द कर दिया I

Dr. Manmohan Singh ji की निजी जिंदगी : 

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह जी न सिर्फ अपने शांत, ईमानदार और बुद्धिमान व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं, बल्कि उनका निजी जिंदगी भी उतना ही सरल और प्रेरणादायक है। 1958 में डॉ. सिंह जी ने Guru Sharan Kaur से शादी की, वह भारतीय इतिहास के प्रोफेसर और लेखिका है, और वह हमेशा डॉ. सिंह के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में मजबूत सहारा बनी, मनमोहन सिंह जी को तीन बेटियां हुई, बड़ी बेटी उपिंदर सिंह, दूसरी बेटी अमृत सिंह और छोटी बेटी दमन सिंह, यह तीनों ही अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित हैं I

Dr. Manmohan Singh जी की बड़ी बेटी उपिंदर सिंह यह एक भारतीय इतिहासकार हैं, जो दिल्ली के अशोक विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर हैं और संकायाध्यक्ष हैं और विदेश मंत्रालय में सलाहकार के रूप में भी काम कर चुकी हैं, और उन्हें सामाजिक विज्ञान {इतिहास} श्रेणी में प्रथम इन्फोसिस पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है, उपिंदर सिंह की शादी देविंदरसिंह से हुई और वह एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं I 

Dr. Manmohan Singh ji की मौत : 

बढ़ती उम्र के कारण Dr. Manmohan Singh जी की गुरुवार 26 दिसंबर 2024 को अचानक तबियत खराब होने की वजह से रात 8:00 बजे दिल्ली के एम्स अस्पताल में इमर्जेन्सी वार्ड में भर्ती कराया गया, डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका, और रात 9:51 पर डॉक्टरों ने ये डिक्लेर कर दिया कि डॉ. मनमोहन सिंह जी अब हमारे बीच नहीं रहे। डॉ. सिंह जी 92 साल के थे, और वो काफी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसकी वजह से वो कई बार अस्पताल में अडमिट भी थे।

कुछ साल पहले ही Dr. Manmohan Singh जी बाईपास सर्जरी भी हुई थी I डॉ. सिंह जी को अंतिम विदाई देने देश और दुनिया के बड़े बड़े हस्तियां दिल्ली पहुँचे थे, कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने डॉ. मनमोहन सिंह जी के मौत पर दुख जताया, और कांग्रेस ने सात दिनों तक अपने सारे राजनीतिक कार्यक्रम रद्द किए थे, और सात दिनों का राजकीय शोक रखा है, और हिंदुस्तान के करोड़ों जनता को भी अपने होनहार, ईमानदार, लोकप्रिय राजनेता को खोने का गहरा दुख हुआ था। डॉ. मनमोहन सिंह जी हिंदुस्तान के गरीब और छोटे वर्ग के लोगों के लिए एक मसीहा थे, जिनके चले जाने से पूरे हिंदुस्तान में शोक और दुख का माहौल था। 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए गहरा दुख व्यक्त किया, सोशल मीडिया पर ट्वीट कर पीएम मोदी ने लिखा कि “भारत ने अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक Dr. Manmohan Singh जी को खो दिया है।” साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वो एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्र बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित सरकार के कई अहम पदों पर काम किया, और देश के आर्थिक नीतियों पर गहरी छाप छोड़ी I संसद में उनके विचार भी हमेशा गहन और मार्गदर्शन रहे। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रयास किए। 

   Dr. Manmohan Singh जी का जीवन हमें सीखाता है कि सादगी, इमानदारी और गहरी सोचो से बड़े से बड़े मुश्किल का भी हल निकाला जा सकता है, और हर मुश्किल के बाद आसानी जरूर मिलती है। Dr. Manmohan Singh जी ने 1970 से लेकर 2014 तक अलग अलग पद पर रह कर हिंदुस्तान की सेवा की। हर एक किरदार में उनकी छवि बेदाग नेता की रही। उन्होंने न सिर्फ हिंदुस्तान को आर्थिक संकट से बचाया, बल्कि गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए ऐसी योजनाएं लागू की जिनका असर आज भी लाखों हिंदुस्तानियों के जिंदगियों में देखा जा सकता है। 

हिंदुस्तान के इस महान शख्सियत के जीवन के संघर्ष की कहानी न सिर्फ इतिहास के किताबों में दर्ज है, बल्कि आने वाले पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन कर हमेशा जिंदा रहेगी। डॉ. मनमोहन सिंह जैसा राजनेता हिंदुस्तान की सरकार में ना कभी कोई था, ना है और ना कभी होगा, रहती दुनिया तक डॉ. मनमोहन सिंह जी को लोग एक बेमिसाल, समझदार, ईमानदार और लोकप्रिय नेता होने की वजह से पहचानेगी। 

तो दोस्तों यह थी हिंदुस्तान को कंगाल होने से बचाने वाले अर्थशास्त्र, जमीन से जुड़े राजनेता और लोकप्रिय प्रधानमंत्री Dr. Manmohan Singh ji जी के जीवन का परिचय।

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