हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को Hollywood स्टाइल से रूबरू करवाया Style Icon फिरोज खान… जी हां आज हम जानेंगे 70 और 80 के दशक के स्टाइलिश, रुबाबदार, हैंडसम जिनके आंखों में गजब की चमक और चेहरे पर गजब की कशिश और चाल ढाल में शेरों जैसा रुबाब और इस सबके साथ मदमस्त करने वाली खूबसूरती, रोबदार आवाज और उनके तेवरो से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में खौफ छाया हुआ था I
यूं तो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बहुत से दिग्गज अदाकार रह चुके हैं, जैसे कि Dilip Kumar sahab, Amjad Khan, Sunil Dutt sahab, Dev Anand sahab, Shashi Kapoor sahab, Vinod Khanna, Amitabh Bachchan, और Raj Kapoor sahab लेकिन फिरोज खान साहब यह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे पहले अदाकार है जिन्होंने हॉलीवुड स्टाइल को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनाया था I
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लगभग 50 सालों तक अपने अलग स्टाइल आईकॉन और टैलेंट के बलबूते पर बड़े पर्दे पर लाखों करोड़ों सिनेमा प्रेमियों को अपना मुरीद बनाने वाले इस अदाकार के जिंदगी का हर एक पहलू बेहद ही दिलचस्प रहा है, इन्होंने कई सालों तक लाखों करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज किया I इन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का पहला Cowboy भी कहा जाता है I
साल 1970 में Style Icon और Cowboy कहीं जाने वाले फिरोज खान का जन्म 25 सितंबर 1939 को बैंगलोर भारत में हुआ, खान साहब का असली नाम जुल्फिकार अली शाह खान है, उनके पिता का नाम सादिक अली खान तानोली है जो अफगानिस्तान के गजनी शहर से ताल्लुक रखते, उनकी मां का नाम फातिमा जो की एक ईरान के फारसी वंश से थी I
खान साहब के मां का परिवार घोड़ा पालन का काम करता था, और उनकी शुरुआती पढ़ाई Bishop Cotton Boys’ School and St. German’s High School बेंगलुरु में हुए, उन्हें विद्रोही बताते हुए तीन स्कूलों से निकाल दिया गया, खान साहब को सात भाई बहन है, जिनमें वह सबसे बड़े हैं, उनके छोटे भाई शाह अब्बास खान जिन्हें हम अदाकार संजय खान के नाम से जानते हैं, दूसरे शाहरुख शाह अली खान, तीसरी समीर खान और चौथे अकबर खान है, इनमें से शाहरुख के अलावा बाकी सभी भाई फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं I 1990 के दशक में छोटे पर्दे पर एक मशहूर ऐतिहासिक टीवी सीरियल “The Sword of Tipu Sultan” (द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान) फिरोज खान साहब के छोटे भाई संजय खान ने बनाया था, जो मैसूर के बादशाह टीपू सुल्तान के जीवन पर आधारित था, और इस धारावाहिक के जरिए से टीपू सुल्तान के बहादुरी और उनके संघर्ष को हर घर घर में पहुंचा था I
खान साहब की दो बहने हैं खुर्शीद शाहनवर और दिलशाद बेगम शेख हैं, जिन्हें दिलशाद बीबी के नाम से जाना जाता है। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनकी चाल ढाल, लुक्स पर्सनालिटी और ड्रेसिंग सेंस को देखते हुए दोस्तों ने कहा कि खान साहब को फिल्मों में ट्राई करना चाहिए I दोस्तों की बातें सुन कहीं ना कहीं खान साहब को भी खुद पर कॉन्फिडेंस होने लगा और वह फिल्मी करियर के बारे में सोचने लगे I सीनियर कैंब्रिज परीक्षा पास करने के बावजूद खान साहब कभी कॉलेज नहीं गए, वो फिल्मी करियर बनाने के लिए बॉम्बे यानी मुंबई चले आए I
बाकी लोगों की तरह काफी संघर्ष करने के बाद कम बजट और छोटे बैनर की फिल्म से अपने उरूज की पहली सीढ़ी मानकर चढ़ने वाले फिरोज खान को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री 1956 में “हम सब चोर हैं” इस फिल्म में रोल मिला, इस फिल्म में खान साहब चंद पलों के लिए ड्राइवर के किरदार में नजर आए I बहुत से दिग्गज कलाकारों से सजी इस फिल्म में उनका किरदार बहुत छोटा था, लेकिन किसी तरह से खान साहब का फिल्मों में आगाज हुआ, और खान साहब को इस आगाज को जारी रखने की जरूरत थी, इसके लिए उन्होंने “बड़े सरकार” और “जमाना” जैसी फिल्मों का सहारा लिया, लेकिन पहचान अभी दूर थी I
साल 1959 में दत्त साहब की फिल्म “DIDI” में आकर्षित करने वाला रोल मिला, बड़े-बड़े दिग्गज कलाकारों के बीच मधु नाम के नौकर का एक छोटा सा किरदार से अपनी पहचान बनाई, दीदी फिल्म को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खान साहब की पहली फिल्म के नाम से पहचान मिली I घर छोड़कर हीरो बनने के लिए निकले खान साहब को कुछ सालों के संघर्षों के बाद साल 1960 में आई फिल्म “घर की लाज” में अभिनय करने का मौका मिला निर्देशक V. M. Vyas के निर्देशन में बने इस फिल्म में खान साहब के साथ Nirupa Roy मुख्य किरदार में थी, और यहां पर भी बजट और दर्शकों ने खान साहब का साथ नहीं दिया, एक सशक्त किरदार में होने के बावजूद भी यह फिल्म भी पिछली फिल्मों की तरह ही फ्लॉप हो गई I
कामयाबी की तलाश में घूम रहे खान साहब को साल 1962 में हॉलीवुड की फिल्म “Tarzan Goes To India” इस फिल्म में प्रिंस रघु का किरदार मिला, इस फिल्म में उनके अलावा Simi Garewal और Murad जैसे अन्य भारतीय कलाकार शामिल थे I इसी साल खान साहब को फिल्म “Reporter Raju” में बेहतरीन किरदार मिला, कामयाबी अभी उनसे दूर थी, लेकिन खान साहब खुश थे कि अब उन्हें एक अदाकार के तौर पर लगातार अच्छा काम मिल रहा है I
हिंदुस्तानी सिनेमा के स्टंट फिल्मों से लेकर हॉलीवुड के फिल्मों तक अपनी मौजूदगी का एहसास करवा चुके खान साहब के जिंदगी में 1965 यह यादगार साल साबित हुआ, इस साल उनके करियर की पहली बड़ी और सबसे कामयाब फिल्म “ऊंचे लोग” रिलीज हुई, इस फिल्म में उनके साथ उनके Ideal दिग्गज कलाकार राजकुमार और अशोक कुमार जी उनके साथ काम कर रहे थे, इस फिल्म ने खान साहब को एक अलग ही पहचान दिलाई, और यहीं से उनको बड़ी बजट और बड़े बैनर की फिल्में मिलना शुरू हुई, और इस तरह से खान साहब का फिल्मी करियर का सफर चल पड़ा I
इसी साल खान साहब को रामानंद सागर साहब की सुपर हिट फिल्म “Arzoo” में काम करने का मौका मिला और यह उस साल की चौथी सबसे बड़ी हिट फिल्म थी, इस फिल्म में खान साहब को किस तरह से रोल मिला यह भी एक दिलचस्प किस्सा है I फिल्म आरजू में खान साहब के साथ काम कर रहे अदाकार राजेंद्र कुमार ने उन्हें साल 1963 की फिल्म “बहु रानी” में देखा था, इस फिल्म में खान साहब का अभिनय उन्हें खूब पसंद आया था, और आरजू फिल्म के सेकंड लीड किरदार के लिए जब कुछ हीरो ने रिजेक्ट किया, राजेंद्र कुमार ने ही रामानंद सागर जी को खान साहब का नाम सजेस्ट किया, और राजेंद्र कुमार की सलाह और रामानंद सागर जी ने मान ली I
इसी तरह का एक और दिलचस्प किस्सा 1962 में आई फिल्म “मैं शादी करने चला” से भी जुड़ा हुआ है, यह फिल्म पांच बहनों की कहानी है, और इन पांच बहनों के अपोजिट पांच हीरो को कास्ट करने के बाद थी, खान साहब को इस फिल्म के लिए फाइनल कर लिया गया, एक दिन सेट पर काम करने के दौरान वह इस फिल्म की एक अदाकारा तबस्सुम के पास आए और उनसे कहा कि आप इस फिल्म लाइन में काफी समय से काम कर रही है, और इस फिल्म के डायरेक्टर किशोरी से भी आपके काफी अच्छे ताल्लुक हैं, तो आप उनसे कहिए कि वह मेरी और आपकी जोड़ी बना दे, और तबस्सुम ने खान साहब की इस बात को मना कर दिया, इस बात से नाराज खान साहब ने फिर कभी अदाकारा तबस्सुम के साथ काम नहीं किया I एक तरफ जहां खान साहब का कैरियर तेजी से आगे बढ़ रहा था, तब सुंदरी नाम की एक Air Hostess से लव मैरिज कर ली, और सुंदरी खान से उन्हें दो बच्चे हुए बेटी लैला खान और बेटा फरदीन खान I
खान साहब का कैरियर दिन ब-दिन ऊंचाइयां छूने लगा, इसी दौरान खान साहब को 1967 में उनकी फेवरेट अदाकारा नरगिस जी के साथ फिल्म “रात और दिन” में काम करने का मौका मिला, यह फिल्म नरगिस जी की आखिरी फिल्म रही I साल 1969 में यश चोपड़ा के डायरेक्शन में बनी फिल्म “आदमी और इंसान” इस फिल्म के लिए खान साहब को Best Supporting Actor के कैटेगरी में फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया I
विदेशी लोकेशंस और रेसिंग की शौकीन खान साहब को यह समझ आ गया था कि उन्हें दूसरे बैनर के तले वह सब कुछ करने का मौका नहीं मिलेगा जिसे वह ऐसा अप्रतिम सिनेमा की दुनिया में करना चाहते हैं, और इसीलिए उन्होंने डायरेक्शन में हाथ आजमाने के लिए उसकी बारिकिया सीखनी शुरू कि, और इसके बाद 1972 में खान साहब के डायरेक्शन में पहली फिल्म “अपराध” बनी, जिसमें यह प्रोड्यूसर के रूप में भी काम कर रहे थे, इस फिल्म के कुछ सीन Germany में शूट किए गए, इस फिल्म में खान साहब के साथ अदाकारा मुमताज ने मुख्य किरदार निभाया I
इसके बाद साल 1974 में खान साहब की 6 फिल्में रिलीज हुई, जिसमें “भगत धन्ना जाट” नाम की एक पंजाबी फिल्म भी शामिल रही, इसके अलावा फिल्म “खोटे सिक्के” में इनके COWBOY के किरदार को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया I इसके अगले साल 1975 में खान साहब के डायरेक्टर और प्रोडक्शन में बने फिल्म “धर्मात्मा” रिलीज हुई, इस फिल्म से खान साहब ने बड़े कलाकारों के भव्य रूप से पर्दे पर लाने का जुनून सफल हुआ, अफगानिस्तान में शूट हुई यह हिंदुस्तान की पहली फिल्म थी I
धर्मात्मा इस फिल्म के लीड रोल में नजर आए अदाकारा हेमा मालिनी की खूबसूरती को खान साहब ने इस तरह से पर्दे पर रखा था कि उस दौर के दर्शक तो छोड़िए बल्कि बहुत से दिग्गज डायरेक्टर और प्रोड्यूसर दंग रह गए थे, धर्मात्मा म्यूजिक सुपर डुपर हिट रही, और इसी के साथ यह खान साहब के प्रोडक्शन की पहली सुपरहिट फिल्म साबित हुई I फिल्म धर्मात्मा को मिले रिस्पांस को देखकर खान साहब ने अपनी दूसरी फिल्म कुर्बानी की Announcement कि, जिसके लिए कहा जाता है कि इस फिल्म के सेकंड लीड एक्टर के तौर पर अदाकार अमिताभ बच्चन को डिसाइड किया था, लेकिन उनके मना करने के बाद खान साहब ने इस किरदार के लिए विनोद खन्ना को कास्ट किया I
इस फिल्म से शुरू हुई खान साहब और विनोद खन्ना की दोस्ती वह आगे मरते दम तक बरकरार रही, खान साहब और विनोद खन्ना की जिंदगी इत्तेफाक से जुड़ी रही, जिनमें से एक इत्तेफाक यह है कि इन दोनों ने 1985 में अपने बीवियों को तलाक दिया और एक इत्तेफाक यह रहा कि इन दोनों ही अदाकारों ने एक ही तारीख पर इस दुनिया को अलविदा कहा था I लगभग 2 करोड़ की बजट में बने इस फिल्म में खान साहब ने अपने हर इरादे को मुर्थ रूप दिया था, इटालियन एक्शन क्राईम फिल्म “द मास्टर टच” के म्यूजिक पर आधारित फिल्म का म्यूजिक सुपर डुपर हिट रहा, जिसका एक गाना “आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए तो बात बन जाए” इंग्लिश म्यूजिशियन बिद्दू अप्पैया ने पाकिस्तानी पॉप सिंगर नाजिया हसन को बॉलीवुड में मौका दिया I
इसी दौरान खान साहब ने अपने बैनर के फिल्मों के लिए पैसे जुटाने के लिए दूसरे बैनर के साथ भी काम करना शुरू किया, आगे चलकर इन्होंने अपनी एक पुरानी कहानी में बदलाव करके 1986 में उस फिल्म “जांबाज” के नाम से रिलीज किया, एक तरफ प्रोफेशनल लाइफ काफी अच्छी चल रही थी, तो वहीं दूसरी तरफ पर्सनल लाइफ में उत्तर-पुथल मच रहे थे, क्योंकि उनकी पत्नी सुंदरी खान से उनका तलाक हो चुका था, एक Air Hostess से शादी टूटने की वजह भी एक Air Hostess ही रही, इनका नाम ज्योतिका धनराज था, इनके अलावा उनके दौर की कुछ दूसरी बड़ी अभिनेत्री के साथ भी खान साहब का नाम जोड़ा गया था, जिसमें अदाकारा मुमताज और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की बोल्ड अदाकारा जीनत अमान का नाम लिया जाता था I
जांबाज फिल्म का एक गाना “हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में” खूब मशहूर हुआ था, इस फिल्म में उनके साथ अदाकारा श्रीदेवी थी, खान साहब जांबाज के बाद अपनी अगली फिल्म “यलगार” का काम शुरू किया, लेकिन इसी दौरान एक दिन खान साहब ने साउथ इंडस्ट्री की एक फेमस फिल्म “Nayakan” देखने के बाद यलगार छोड़कर Nayakan को हिंदी में फिल्म “Dayavan” के नाम से 1988 में बनाया I एक बार फिर खान साहब ने अपने जिगरी दोस्त विनोद खन्ना साहब को अदाकारा माधुरी दीक्षित के साथ कास्ट किया, और यही वह पहली कामयाब फिल्म थी जिसे माधुरी दीक्षित को अपनी करियर में पहचान मिली, और बहुत से आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा I
1988 में बनी यह फिल्म अपने संगीत, अभिनय और 2 मिनट के इंटिमेट सेन की वजह से आज भी विवादों में बनी रहती है, क्योंकि इस फिल्म में अदाकारा माधुरी दीक्षित को अपने से उम्र में 20 साल बड़े अदाकार विनोद खन्ना के साथ एक किसिंग सीन देने की वजह से बहुत से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, और आज भी यह विषय बहुत चर्चित है I दयावान इस फिल्म के दो गाने “आज फिर तुम पर प्यार आया है” और दूसरा “चाहे मेरी जान तू ले ले चाहे इमान तू ले ले” लोग आज भी खूब पसंद करते हैं, और इन गानों को आज के दौर में Arijit Singh, Jubin Nautiyal और Tulsi Kumar के आवाज में रीक्रिएट भी किया गया है I
दयावान फिल्म के कामयाबी के बाद खान साहब ने यलगार फिल्म पर काम शुरू किया, इस बार इस फिल्म के कहानी और कास्टिंग दोनों बदल चुके थे, इस फिल्म में मुकेश खन्ना ने खान साहब के पिता का रोल निभाया था, जो उम्र में उनसे 21 साल छोटे थे I साल 1992 में आई फिल्म यलगार को वह कामयाबी नहीं मिली जिस कामयाबी की खान साहब को आदत हो चुकी थी, और इस फिल्म के बाद खान साहब ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से एक बहुत लंबा ब्रेक ले लिया, लगभग 6 साल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद खान साहब ने अपने बेटे फरदीन खान को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च करने के लिए फिल्मों में वापसी की, और इस बार वह कैमरे के पीछे ही रहे, मतलब पर्दे पर नजर नहीं आए I
यह फिल्म थी साल 1998 में आई “Prem Aggan” यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई, उसके बाद खान साहब ने साल 2003 में अपने बेटे का कैरियर बनाने के लिए पूरी लगन और मेहनत की और आखिरी कोशिश के साथ “Jahreela” फिल्म बनाई, लेकिन इस बार भी फरदीन खान को वह कामयाबी नहीं मिली जो एक दौर में उनके पिता खान साहब को मिली थी, वह अपने पिता को मिली कामयाबी से काफी दूर थे, अपने आजाद ख्याल और बेबाकी के लिए मशहूर खान साहब 2006 में कुछ खबरों के चलते मशहूर हुए कि उन्होंने अपने भाई अकबर खान की फिल्म “Taj Mahal” के प्रमोट के दौरान पाकिस्तानी मुसलमान के खिलाफ एक बयान दे दिया, जिस के चलते पाकिस्तान सरकार ने खान साहब को पूरी तरह से पाकिस्तान में Boycott कर दिया और उन्हें कभी पाकिस्तानी वीजा न देने का फैसला किया I
खान साहब के बच्चे :
खान साहब को दो बच्चे हैं बड़ी बेटी लैला खान जिसका जन्म 1970 में हुआ, और बेटा फरदीन खान का 1974 में जन्म हुआ, बेटी लैला खान की शादी बिजनेसमैन फरहान फर्नीचर वाला से हुई, जो पूजा बेदी के पहले पति थे, और बेटे फरदीन खान की शादी नताशा माधवन से हुई, और वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की दिग्गज अदाकारा मुमताज की बेटी है I दिग्गज अदाकारा मुमताज ने एक इंटरव्यू में कहा कि फिरोज खान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सबसे हैंडसम हीरो थे I खान साहब की भतीजी अदाकार संजय खान की बेटी सुजैन खान की शादी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर Rakesh Roshan के बेटे Hrithik Roshan से हुई, और खान साहब का भतीजा जायद खान भी बॉलीवुड फिल्मों में अदाकार हैं I
खान साहब की मौत और आखिरी फिल्म :
इसके बाद अपने बेटे फरदीन खान की फिल्म “No Entry” के कामयाबी के फौरन बाद डायरेक्टर और प्रोड्यूसर अनीस बज्मी को रात के खाने पर बुलाया, और अनीश बज्मी ने उन्हें फिल्म “Welcome” में काम करने के लिए राजी कर लिया, इस दौरान खान साहब को फेफड़ों के कैंसर के आसार दिखाई दिए, खान साहब ने इस बात को अपने तक ही रखा, उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा, और इस बात का खुलासा अनीस बज्मी ने साल 2024 में किया I
फिल्म Welcome में उनके RDX के किरदार को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया, फिल्म एक्सपर्ट बताते हैं कि खान साहब अपने आखिरी दिनों में वह अपने 1980 में बने फिल्म कुर्बानी के सीक्वल स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे, इसी बीच मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, और खान साहब ने अपने बेंगलुरु में स्थित फार्महाउस पर जाने की ख्वाहिश जताई थी, बेंगलुरु लाने के बाद उन्होंने अपने फार्म हाउस में लगभग रात के 1:00 बजे दुनिया को अलविदा कहा I कुर्बानी फिल्म के सीक्वल स्क्रिप्ट पूरी होने से पहले ही 27 अप्रैल 2009 को फेफड़ों के कैंसर की वजह से उनकी मौत हो गई, और एक कामयाब सितारा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से अलविदा कहा गया I
खान साहब की आखिरी ख्वाहिश थी कि उनके मरने के बाद उन्हें अपने मां के कब्र के पास दफन किया जाए, और उनकी आखिरी ख्वाहिश के मुताबिक बेंगलुरु में होसुर रोड शिया कब्रिस्तान में उनके मां के कब्र के पास उन्हें दफनाया गया I
खान साहब के शौक :
खान साहब को घुड़दौड़ का काफी शौक था और घुड़दौड़ में भाग लेना काफी पसंद था, और साथ ही Snooker खेलना काफी पसंद करते थे, और इसी के साथ वह खुद भी प्रतियोगिता का आयोजन भी करते थे, और आखिरी दिनों में उन्हें दर्शनशास्त्र यानी philosophy की किताबें खूब शौक से पढ़ते और कविता लिखते थे I
परंपरा :
खान साहब अपने तेजतर्रार अंदाज और अनोखी शैली के लिए खूब मशहूर थे, The Print की टीना दास कहती है कि खान साहब ने अपने चमड़े के जूते, टोपिया और सिगार के साथ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में वेस्टर्न लुक वाइल्ड वेस्ट लेकर आए, और खान साहब ने यह सब बड़े ही शानदार अंदाज से हैंडल किया, फिल्म फेयर की फरहाना फारूक कहते हैं कि खान साहब ने अपने कामयाबी अपनी शान, शौकत अपनी पहचान को पूरी शिद्दत के साथ अपनी आखिरी सांस तक निभाया, और वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के असली ओरिजिनल खान है I Subhash K. Jha जो भारतीय एक पत्रकार और फिल्म एक्सपर्ट है वह बताते हैं कि खान साहब फिल्म इंडस्ट्री में सबसे कूल एक्टर है, और फिल्म फेयर ने उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे स्टाइलिश मर्दों के सूची में चौथा स्थान दिया, खान साहब के मौत के कई सालों बाद साल 2022 में उन्हें आउटलुक इंडिया की “75 सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड अभिनेताओं” की सूची में रखा गया I
खान साहब को मिले अवार्ड और नॉमिनेशन :
खान साहब को साल 1971 में बनी फिल्म “आदमी और इंसान” इस फिल्म के लिए फिल्म फेयर के तरफ से Best Supporting Actor के अवार्ड से सम्मानित किया गया, और साल 2001 में फिल्म फेयर की तरफ से ही लाइफटाइम अचीवमेंट के अवार्ड से नवाज आ गया I इसके बाद साल 2004 में अपने बेटे के लिए बनाई फिल्म “janasheen” में निभाए गए खलनायक यानी नेगेटिव रोल के लिए आइफा अवॉर्ड्स की तरफ से बेस्ट एक्टर इन नेगेटिव रोल के अवार्ड से सम्मानित किया गया I
इसके 4 साल बाद झी सिने अवार्ड की तरफ से लाइफटाइम अचीवमेंट के अवार्ड से नवाजा गया, और यह अवार्ड उन्हें अपने बेटे फरदीन खान के हाथों मिला था I इसके बाद साल 2009 में स्टार डस्ट की तरफ से उद्योग का गौरव यानी pride of industry की पुरस्कार से सम्मानित किया गया I इसके अलावा “सफर” और “अंतरराष्ट्रीय बदमाश” फिल्म के लिए खान साहब को नॉमिनेशन मिला था I
ख़ान साहब की कुछ ख़ास फ़िल्में :
| क्रमांक | फ़िल्म का नाम | वर्ष | सह-कलाकार (फ़िरोज़ ख़ान सहित) | योगदान |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Oonche Log | 1965 | अशोक कुमार, राज कुमार, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
| 2 | Aarzoo | 1965 | राजेन्द्र कुमार, साधना, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
| 3 | Safar | 1970 | राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
| 4 | Mela | 1971 | संजय ख़ान, मुमताज़, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
| 5 | Kala Sona | 1975 | परवीन बाबी, डैनी डेंज़ोंगपा, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
| 6 | Dharmatma | 1975 | हेमा मालिनी, डैनी डेंज़ोंगपा, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता, निर्देशक |
| 7 | Qurbani | 1980 | विनोद खन्ना, जीनत अमान, अमजद ख़ान, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता, निर्देशक |
| 8 | Janbaaz | 1986 | अनिल कपूर, डिंपल कपाड़िया, श्रीदेवी (गेस्ट), फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता, निर्देशक |
| 9 | Dayavan | 1988 | विनोद खन्ना, माधुरी दीक्षित, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
| 10 | Yalgaar | 1992 | संजय दत्त, नागार्जुन, कबीर बेदी, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता, निर्देशक |
| 11 | Welcome | 2007 | अक्षय कुमार, नाना पाटेकर, अनिल कपूर, फ़िरोज़ ख़ान | अभिनेता |
तो दोस्तों यह थी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के Style Icon और COWBOY कहे जाने वाले दिग्गज अदाकार फिरोज खान साहब के जीवन का परिच I